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धन के साथ भक्ति होना जरूरी: पं. श्रीकांत

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बलिया। सांसारिक धन खर्च करने पर कम होता है, लेकिन ईश्वर रूपी धन जितना खर्च होता है, उतना ही बढ़ता जाता है। सांसारिक धन भी सद कार्यों में इस्तेमाल किया जाय तो वह बढ़ता है। धन के साथ भक्ति होना जरूरी है, क्योंकि भक्ति रहित धन विनाश की ओर ले जाता है। कोई व्यक्ति जवान हो और उसके पास काफी धन हो, लेकिन उसे सत्संग नहीं मिले तो वह बिगड़ जाता है। यह बातें पं. श्रीकांत व्यास ने शनिवार को टाउनहाल में श्री राधा माधव सेवा मण्डल एवं मस्ती श्री वृंदावन धाम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सप्ताहव्यापी संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा के पांचवें दिन कहीं।
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श्री व्यास ने कहा कि दुनिया के अन्य कर्मों में घाटा हो सकता है, लेकिन ईश्वर का नाम लेने पर घाटा नहीं, बल्कि लाभ ही लाभ होता है। इस लिए भगवान का नाम जपते रहना चाहिए। सही अर्थों में धनवान वही है जो धन से समाज और राष्ट की सेवा करता है। उन्होंने कहा कि गो धन को सबसे श्रेष्ठ कहा गया है। गाय जितना देती है उतना कोई भी नहीं दे सकता है। नंद बाबा के यहां नौ लाख गाये थी। जब उन्होंने पुत्र होने की खबर सुनी तो दो लाख गाये दान कर दी। भारत ऋषि और कृषि प्रधान देश है। जब तक गाये है तब तक भारत है। गाये नहीं रहेंगी तो भारत भी नहीं रहेगा। गायों के खत्म होने पर यह देश भी खत्म हो जायेगा।
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