बलिया। जिले में मृतक रोजगार सेवक से काम लिया जा रहा है और उसके मानदेय भुगतान के लिए शासन से धन की मांग भी की गई है। सालों से रोजगार सेवकों के मानदेय में गड़बड़झाला का खेल अफसर कर रहे हैं। इसका खुलासा आरटीआई के तहत मिली जानकारी से हुआ है।
जिले में मनरेगा योजना का संचालन कितनी संजीदगी से की जाती है और इसमें किस कदर भ्रष्टाचार है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मृतक रोजगार सेवक को भी मानदेय देने के लिए धन की मांग अधिकारियों ने शासन से की है। शहर के ही रहनेवाले नारायण कुमार ने कुछ दिनों पहले सूचना अधिकार के तहत विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसमें एक जनवरी 2012 से 31मार्च 2014 तक रोजगार सेवकों को दिए मानदेय का ब्योरा व वर्ष 2016-17 में रोजगार सेवकों के बकाया मानदेय, इसका कारण व शासन से धन की मांग के बाबत ब्योरा मांगा था। अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराई सूचना के अनुसार दुबहड़ ब्लाक में एक जनवरी 2012 से 31मार्च 2014 तक कुल 39 रोजगार सेवकों को मानदेय देने व वर्ष 2016-17 में भी 39 रोजगार सेवकों छह लाख दो हजार हजार 580 रुपये का भुगतान करने तथा अवशेष 10 लाख 92 हजार 630 रुपये शासन से मांग करने का जिक्र किया गया है। बताया जाता है कि दुबहड़ ब्लाक के मोहनछपरा गांव के रोजगार सेवक अविनाश पांडेय का निधन महीनों पहले हो चुका है। इसके बावजूद ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने उसके मृतक काल का मानदेय देने के लिए जिला मुख्यालय पर सूची भेज दी और इसी के आधार पर जिले के श्रम एवं रोजगार (मनरेगा) के उपायुक्त ने शासन से धन की मांग भी कर दी है।
अधिकारियों की रिपोर्ट यह बताने के लिए काफी है कि निधन होने के बाद भी रोजगार सेवक काम करता रहा है और मानदेय मिलना चाहिए। इसके अलावा आरटीआई से मिली जानकारी को देखें तो पूर्व के सालों में भी रोजगार सेवकों के मानदेय में खूब गड़बड़झाला किया गया है। वर्ष 2014 में अधिकारियों ने दुबहड़ ब्लाक के 39 रोजगार सेवकों के मानदेय भुगतान के लिए कुल 11.85 लाख की मांग शासन से की और धनराशि मिलने पर इसका भुगतान 40 रोजगार सेवकों को किया गया। यह तो महज उदाहरण है पूरे जिले में रोजगार सेवकों के मानदेय में गड़बड़झाला कर धनराशि का गोलमाल किया गया है।
इनसेट....
ब्लाकों से मिली रिपोर्ट के आधार पर ही शासन से धन की मांग की गई है। मुझे यह याद है कि दुबहड़ ब्लाक के एक रोजगार सेवक की मौत हो चुकी है। इस मामले की पड़ताल कराई जाएगी और उसके मृतक काल का मानदेय नहीं दिया जाएगा और लापरवाही करने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
यूके पाठक, उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार, मनरेगा