बलिया। अब बैंकों की ओर से दिए जा रहे ऋण को सुरक्षित करने के लिए बैंकों की ओर से नई कवायद की गई है। ऋण की स्वीकृति होने के बाद किसानों के खतौनी पर कर्ज का ब्यौरा दर्ज किया जा रहा है। इससे ऋण लेने में किए जाने वाले फर्जीवाड़ा पर लगाम लगेगा।
बताया जाता है कि बैंकों में फर्जी दस्तावेज देकर ऋण लेने के कारण इसकी वसूली के लिए बैंकों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता था। इसके अलावा एक ही जमीन पर अलग-अलग बैंकों से भी ऋण लेने का गोरखधंधा होता रहा। कई मामलों में तो बैंकों को कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा। इसको देखते हुए अब बैंकों ने नियम में बदलाव किया है। बैंक के अधिकारियों की मानें तो आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक ऋण के लिए संबंधित व्यक्ति की ओर से बैंकों में बतौर बंधक रखे गए जमीनों के सापेक्ष स्वीकृत ऋण का ब्योरा अब तहसीलों को भेजा जाएगा। इसके बाद संबंधित तहसील की ओर से खतौनी पर ऋण का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। ऋण का ब्योरा दर्ज खतौनी को प्रस्तुत करने पर ही संबंधित व्यक्ति को ऋण की धनराशि का भुगतान किया जाएगा। इस व्यवस्था से अब एक ही खतौनी पर अलग-अलग बैैंकों से जहां ऋण लेना आसान नहीं होगा। वहीं, फर्जी खतौनी लगाकर बैंकों में फर्जीवाड़ा भी नहीं किया जा सकेगा। एक ही खतौनी पर ऋण लेने के दर्जनों मामले ऋण मोचन योजना को लागू करने के दौरान हुई जांच में सामने आ चुकी है। इसके चलते ही इन किसानों को विभाग ने अपात्र माना था। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एलडीएम डीके सिन्हा ने बताया कि बैंकों में बतौर बंधक रखे गए जमीनों के खतौनी पर ऋण का आदेश अंकित करने का प्रावधान पहले भी था लेकिन एक खतौनी पर दर्ज कर इसे कोरम कर दिया जाता था। लेकिन वर्तमान में सब कुछ ऑनलाइन होने के कारण यह अब पारदर्शी हो गया है, बिना खतौनी पर ऋण ब्योरा दर्ज हुए बैंकों की ओर से भुगतान नहीं जाता है।