बेसिक शिक्षा को मजबूती देने के लिए सरकार भले ही कटिबद्ध हो, लेकिन उसके मातहत उनको चूना लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। तभी तो भवन निर्माण के लिए जो पैसा शासन से 2012-13 में आवंटित हुआ, उस पैसे को लेने के बाद भी भवन आज तक आधा-अधूरा पड़ा है। कुछ ऐसा ही मामला नवीन प्राथमिक विद्यालय कामसीपुर यादव बस्ती से प्रकाश में आया है, जहां आधा-अधूरा भवन बनाकर शासन से आया कुल छह लाख रुपये उतार लिया गया है।
गौरतलब हो कि सत्र 2012-13 में कामसीपुर यादव बस्ती में प्राथमिक विद्यालय बनाने के लिए शासन से छह लाख रुपये आवंटित हुआ। सत्र 2013-14 से पढ़ाई भी शुरू हो जानी थी। लेकिन भवन मूर्त रूप नहीं ले सका, लिहाजा पठन-पाठन शुरू नहीं हो सका। इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी शिकायत तत्कालीन बेसिक शिक्षाधिकारी राकेश कुमार सिंह से की। राकेश कुमार सिंह ने मौका मुआयना करने के बाद पाया कि शासन से आवंटित छह लाख रुपये उतार लिया गया और भवन आधा-अधूरा ही बना है। जिस पर बीएसए ने भवन प्रभारी सूर्यभूषण का वेतन रोक दिया।
लेकिन खंड शिक्षाधिकारी राकेश सिंह की मेहरबानी के कारण उनका वेतन बहाल हो गया। लेकिन भवन जस का तस ही रह गया। इसके बाद ग्रामीणों ने दर्जनों बार शिकायत लेकर बीएसए के पास गए। कई बार जांच भी हुई, लेकिन हर बार खंड शिक्षाधिकारी राकेश सिंह जांच में सच्चाई को उजागार करने से रोकते रहे। फलस्वरूप आज भी भवन आधा-अधूरा ही पड़ा है। गांव के ही रामनारायण यादव ने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रामनारायण यादव का कहना है कि तत्कालीन बेसिक शिक्षाधिकारी राकेश सिंह ने इस मामले में संजीदगी दिखाते हुए भवन प्रभारी का वेतन तो रोक दिया था, लेकिन खंड शिक्षाधिकारी राकेश कुमार सिंह की मेहरबानी से उनका वेतन बहाल हो गया। इसके बाद जब-जग जांच हुई खंड शिक्षाधिकारी जांच में पर्दा डालते रहे। आरोप लगाया कि भवन प्रभारी और खंड शिक्षाधिकारी की साठगांठ के कारण ही आज तक भवन नहीं बना है।
मामला अभी संज्ञान में नहीं है। यदि पैसा उतार लेने के बाद भी भवन आधा-अधूरा बना पड़ा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
= सुभाषचंद्र गुप्त, बीएसए