बलिया। गांव से लेकर नगरीय इलाकों को कागजों पर ही ओडीएफ करने का खेल किया जा रहा है। ओडीएफ के लिए निर्धारित मानकों की पड़ताल भी केवल कोरम बन कर रह गया है। अधिकांश ओडीएफ घोषित गांवों में अभी भी शौचालय निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका है।
जिले में वर्ष 2016-17 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है और इसके तहत जिले के कुल 1843 गांवों को ओडीएफ करने के लिए कुल तीन लाख 87 हजार 980 शौचालयों का निर्माण कराया जाना था। इसके लिए शासन से प्रति शौचालय 12 हजार के हिसाब से धनराशि भी पंचायती राज विभाग को मिल चुकी है। लेकिन ढाई साल बाद भी न तो सभी गांवों में शौचालय बने और न ही सभी गांव ही ओडीएफ हो सके। जबकि गांवों को ओडीएफ करने के लिए ढाई सालों में कई बार शासन की ओर समय सीमा में इजाफा किया गया और दो अक्टूबर 2018 तक अंतिम बार समय सीमा निर्धारित की गई थी। लेकिन इसके बावजूद जिले के सभी गांव ओडीएफ नहीं हो सके। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिले के कुल 515 गांव ओडीएफ हो चुके हैं और कुल 1501 गांवों को ओडीएफ करने के लिए एमआईएस फीडिंग की गई है, जो अगले कुछ दिनों में ओडीएफ हो जाएंगे। बताया जाता है कि पंचायती राज विभाग के अधिकारी कागजों पर ओडीएफ घोषित कर अपना गला बचाने में जुटे हैं।
आलम यह है कि अधिकांश ओडीएफ गांवों में आज भी शौचालय निर्माण का कार्य चल रहा है, जबकि वह गांव दो साल पहले के ओडीएफ घोषित हो चुके हैं। बतौर उदाहरण शहर से सटे दुबहड़ ब्लॉक के जमुआ गांव को देखें तो इस गांव को ओडीएफ करने के लिए वर्ष 2016-17 में 520 शौचालयों के निर्माण के लिए कुल 62 लाख 40 हजार की धनराशि विभाग से मुहैया कराई गई। इस गांव को विभाग की ओर से वर्ष 2017-18 में ओडीएफ घोषित कर दिया गया लेकिन इस गांव में शौचालय निर्माण का कार्य अभी पूरा नहीं हो सका है। इसकी पुष्टि दुबहड़ के बीडीओ कपिलदेव ने मंगलवार को करते हुए बताया कि गांव में शौचालय का निर्माण चल रहा है। इसी तरह सांसद आदर्श गांव ओझवलिया को भी वर्ष 2017-18 में ओडीएफ कर दिया गया जबकि लक्ष्य के सापेक्ष गांव के करीब 100 परिवारों को शौचालय का आवंटन ही नहीं किया गया। ग्राम प्रधान विनोद दुबे की मानें तो इसके लिए वह कई बार अधिकारियों से गुहार लगाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ओडीएफ के लिए दो माह की समय सीमा बढ़ी
बलिया। गांवों को ओडीएफ करने के लिए शासन ने एक बार फिर दो माह की मोहलत दे दी है। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मानें तो दो अक्टूबर 2018 तक सभी गांवों को ओडीएफ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन समय से शौचालय निर्माण का कार्य पूरा नहीं होने के कारण शासन की ओर से सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए अब 30 नवंबर 2018 की तिथि तय की है। डीपीआरओ की मानें तो इस आशय का पत्र भी विभाग को प्राप्त हो चुका है।
शौचालयों के निर्माण में खूब हुआ गड़बड़झाला
बलिया। शौचालयों के निर्माण में सालों से गड़बड़झाला किया जा रहा है। वर्ष 2012-13 में 12308, वर्ष 2013-14 में 7581, वर्ष 2014-15 में 8390, वर्ष 2015-16 में 8897, वर्ष 2016-17 में अलग-अलग योजनाओं के तहत जिले में 33 हजार 523 शौचालयों के निर्माण के लिए शासन की ओर से धनराशि उपलब्ध कराई गई। इसमें केवल वर्ष 2016-17 के शौचालयों के निर्माण के लिए 40 करोड़ 22 लाख 76 हजार की धनराशि पंचायती राज विभाग को मिली। लेकिन विभाग ने वर्ष 2015-16 व 2016-17 में धनराशि को लाभार्थियों के खाते में न भेज कर ग्राम पंचायतों के खाते में भेजा। इसके चलते अधिकांश गांवों में शौचालयों की धनराशि का बंदरबांट किया गया। हैरानी की बात है कि धनराशि भेजने के बाद विभागीय अधिकारियों ने कभी इसकी सुधि नहीं ली और सालों बाद जब सुधि ली तो गबन सामने आने पर कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लिया।
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सभी गांवों को ओडीएफ करने की प्रक्रिया चल रही है। 1501 गांवों को ओडीएफ के लिए एमआईएस फीडिंग की गई है, जबकि 515 गांव ओडीएफ हो चुके हैं। शासन की ओर से 30 नवंबर तक ओडीएफ की समय सीमा बढ़ा दी गई है।
एसडी पांडेय, डीपीआरओ, बलिया