बैरिया (बलिया)। उफनाई घाघरा चाईछपरा से होकर अधिसिझुआ व गुमानी के डेरा होते हुए फतेराय के टोला तक भूमि काट रही है। किसानों के कांदा व परवल की 20 बीघा फसल अब तक घाघरा नदी में समा चुकी है। 25 दिनों में करीब 100 बीघे से ऊपर उपजाऊ भूमि कटान की भेंट चढ़ चुकी है। अब घाघरा पुरानी रेलवे लाइन की ओर बढ़ रही है। जो कभी कटान की भेंट चढ़ सकती है। पुरानी रेलवे लाइन की तरफ प्रतिदिन घाघरा करीब 25 मीटर जमीन को काट रही है। रेलवे लाइन से नदी 200 से 400 मीटर ही रह गई है। अगर पुरानी रेलवे लाइन कटी तो आधा दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ आना तय है। अगर रेलवे लाइन कटी तो विशुनपुरा, अधिसिझुआ, फतेराय के टोला, चाईछपरा, बकुल्हा, उपाध्यापुर, शिवाल आदि गांव में नदी का पानी घुस जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि अगर पुरानी रेलवे लाइन टूटी तो गांव में तबाही आ जाएगी। वहीं अधिसिझुआ निवासी रामजी बिंद, शंकर बिंद, हरेराम बिंद, लछु बिंद, लक्ष्मण बिंद, रामआशीष बिंद, महेश तुरहा, गणेश तुरहा आदि की करीब 20 बीघा कांदा व परवल की फसल घाघरा में समा चुकी है। बीते 10 सालों में कई वैसे किसान भी अब भूमिहीन हो गए जो पहले सैकड़ों बीघे के काश्तकार थे। इस बाबत तहसीलदार गुलाब चंद्रा ने कहा कि निरीक्षण कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
उधर बेल्थरारोड में लाल निशान से ऊपर बहने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में कभी स्थिरता तो कभी उतार-चढ़ाव का क्रम बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग का कहना है कि नदी का जलस्तर पिछले एक हफ्ते से बढ़ाव के बाद शनिवार को जल स्तर 64. 37 मीटर पर स्थिर हो गया, जो लाल निशान से 36 सेंटीमीटर अधिक है। आयोग का कहना है कि अगले 24 घंटे में जल स्तर में कमी हो सकती है। आयोग के पूर्वानुमान पर गौर करें तो जल स्तर में घटाव से बाढ़ की संभावना फिलहाल टल गई है।
मठिया-गुलौरा स्थित शिव मंदिर के पास तीव्र कटान से मंदिर का अस्तित्व खतरे में है। रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। चैनपुर गुलौरा क्षेत्र में कटान हो रही है। देवरिया जिले के तटवर्ती क्षेत्रों में बने कटान निरोधी ठोकर से टकराने के बाद नदी की जलधारा सीधे मुड़कर बलिया जिले के तटवर्ती क्षेत्रों में पहुंचती है, जिसके चलते तीव्र गति से कटान हो रही है।