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अलग सोच रखते थे चंद्रशेखर: रविशंकर

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बलिया। चंद्रशेखर विचार मंच तथा शेखर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 11वीं पुण्यतिथि चंद्रशेखर उद्यान में मनाई गई। इस दौरान सर्वधर्म प्रार्थना सभा एवं श्रद्घांजलि सभा आयोजित की गई। गण्यमान्य व्यक्तियों ने चंद्रशेखर जी के चित्र के समक्ष श्रद्घा सुमन अर्पित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ चंद्रशेखर के अनन्य सहयोगी रहे पूर्व ब्लाक प्रमुख वंश बहादुर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधान परिषद सदस्य रविशंकर सिंह पप्पू ने कहा कि जननायक चंद्रशेखर एक अलग सोच तथा पहचान रखते थे। वो राजनीति में लाभ के लिए कोई कार्य नहीं करते थे। अपने जीवनकाल में कभी भी गलत कार्य को बर्दाश्त नहीं किया। भले ही इसके लिए उन्हें कोई कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने अपने नाम से सिंह हटाकर प्राचीन क्षत्रिय परंपरा को स्थापित किया कि जन्म से कोई सिंह नहीं होत्रा, बल्कि कर्म से होता है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का पहनावा भी धोती कुर्ता रहा, जिसने साबित किया कि वह आम आदमी की तरह जीवन जीना चाहते हैं। उन्होंने कभी भी लिखित भाषण नहीं पढ़ा। चार महीने की अल्पमत सरकार में रामजन्म भूमि, बाबरी मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए उन्होंने गंभीर प्रयास किए। कहा कि चंद्रशेखर उद्यान में शीघ्र ही चंद्रशेखर की आमद कद प्रतिमा लगाई जाएगी। समस्त आगंतुकों ने उनके चित्र पर श्रद्घासुमन अर्पित किया। इस मौके पर अनिल सिंह, मनोज सिंह, गिरिजाशंकर सिंह, बलवंत सिंह, श्याम बहादुर सिंह, उमाशंकर पाठक, द्विजेंद्र मिश्र, नपा अध्यक्ष अजय कुमार, गोरख पासवान, सुधीर पासवान, संजय उपाध्याय, लक्ष्मण गुप्ता, टीएन मिश्र, राणा प्रताप सिंह, अनिरुद्घ सिंह, आलोक कुमार, सूर्यबली सिंह, योगेंद्र सिंह, विवेक सिंह, विनोद सिंह, अमित सिंह, आलोक सिंह झुनझुन, पिकू सिंह, सुरेंद्र कन्नौजिया, करण सरावगी आदि रहे। अमित सिंह बघेल ने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया।
उधर, पूर्व पीएम चंद्रशेखर की 11वीं पुण्यतिथि सत्येंद्र भवन में जेपी विचारमंच के संयोजक द्विजेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस मौके पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए लोकतंत्र रक्षक सेनानी सुभ्रांशु शेखर पांडेय ने कहा कि चंद्रशेखर कार्यकर्ताओं के नेता थे। उनकी कथनी करनी में कोई अंतर नहीं था। सेनानी देवेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि आमजन स्वजन कार्यकर्ताओं और जन्मभूमि से चंद्रशेखर का जगजाहिर लगाव था। अध्यक्षीय संबोधन में द्विजेंद्र कुमार ने कहा कि पूर्व पीएम चंद्रशेखर को बलिया की माटी से अथाह लगाव था। इस मौके पर अजय बहादुर सिंह, एसएस तिवारी, निर्भय नारायण सिंह, मृत्युंजय तिवारी बब्लू, अकमल नईम खां, भोला बाबू, बासुदेव ठाकुर, विजय शंकर, राजेंद्र पांडेय, कन्हैया आदि रहे। संचालन संतोष कुुमार शुक्ला ने किया।
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भीमपुरा/ बेल्थरारोड संवाददाता के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 11वीं पुण्यतिथि उनके पैतृक गांव इब्राहिमपट्टी स्थित अवधूतेस्वर नाथ शिव मंदिर के प्रांगण में भी मनायी गई। क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। साथ ही सुंदरकांड और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनकी बेबाक टिप्पणी को देश नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के राजनीतिज्ञ भी लोहा मानते थे। उन्होंने कभी जाति, धर्म, संप्रदाय व व्यक्तिवाद की राजनीति नहीं की। इस मौके टाई बाबू, सालिका सिंह, बब्लू यादव, टुनटुन सिंह, पप्पू सिंह, राजेश सिंह, सोहन यादव, कैलाश यादव, बाबू लाल आदि उपस्थित रहे। उधर, फतेह बहादुर सिंह शिवशंकर सिंह महाविद्यालय के प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने चंद्रशेखर के बहुआयामी प्रतिभा की चर्चा करते हुए उन्हें समाजवादी आंदोलन का अग्रदूत बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ चंद्रशेखर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आद्या शंकर यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आदर्श राजनेता थे और उन्होंने समाजवादी आंदोलन को नई धार देते हुए सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। प्रबंधक शिव शंकर सिंह पिंकू ने चंद्रशेखर को राजनैतिक पुरोधा करार देते हुए उनके आदर्शों के अनुरूप राष्ट्र निर्माण का संकल्प जताया। इस मौके पर नन्हे सिंह, जमील अंसारी, विनीत गुप्त, विवेक परिहार, दीपक गुप्त, अंगद यादव, बलवंत कुमार आदि रहे ।
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