रसड़ा। किसी जमाने में चीनी मिल कर्मी हर सुख सुविधा से युक्त रहते थे। आज वही मिल कर्मी दुर्दशा एवं अपनी बदहाली पर बयां करते नहीं थक रहे है। आलम यह है कि धन के अभाव में उनका परिवार भूखमरी के कगार पर पहुंच गया है। लड़के व लड़कियों की पढ़ाई तक बाधित हो गई है। अब परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है।
सुरक्षाकर्मी हीरा सिंह राणा ने बताया कि एक वर्ष से वेतन न मिलने के कारण परिवार का भरण-पोषण करना तथा बच्चों की पढ़ाई करना काफी मुश्किल हो गया है। सुरक्षाकर्मी काशीनाथ सिंह का कहना है कि वेतन एवं फंड न मिलने के कारण मैं अपनी पुत्री की शादी तय नहीं कर पा रहा हूं। सुरक्षाकर्मी कमलाकर तिवारी ने कहा कि मिल परिसर का पानी और बिजली का कनेक्शन काट दिया गया है। जिससे परिवार वालों के साथ-साथ ड्यूटी करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मोल्डर कर्मी सत्यदेव राम ने कहा कि मैं तथा मेरी पत्नी दोनों ही गंभीर रूप से बीमार है। पेैसे के अभाव में दोनों का इलाज नहीं हो पा रहा है। फिटर जयहरि शर्मा ने कहा कि मेरी मानसिक स्थिति ठीक नहीं चल रही है। पैसे के अभाव में अपना इलाज नहीं करवा पा रहा हूं। पूर्व ड्राइवर सुदामा सिंह ने कहा कि प्रबंधतंत्र की लापरवाही से हम लोगों का फंड एवं ग्रेजुएटी कम मिला है। जिससे कारण कर्मचारी उच्च नयायालय की शरण में है। सरकार के भरोसा के बाद भी इन कर्मियों के मिल चलने के आसार कम नजर आ रहे हैं। कर्मियों का कहना है कि मिल को नए सिरे से निर्माण करके ही सुचारु रूप से चलाया जा सकता है। कारण के सभी कलपुर्जे क्षतिग्रस्त हो चुके है।
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पिछली सरकार ने दिया था नौ करोड़
रसड़ा। सपा शासनकाल में मिल के कर्मचारियों के वेतन एवं फंड ग्रेजुएटी के लिए पिछले वर्ष नौ करोड़ का बजट दिया गया था। जिससे कर्मचारियों का बकाया वेतन एवं फंड ग्रेजुएटी का निस्तारण किया गया। लेकिन अभी भी लगभग दो दर्जन कर्मचारियों का वेतन एक वर्ष से बकाया है। प्रबंध तंत्र के लापरवाही का आलम यह है कि दो दर्जन कर्मचारियों का ऑफिस रिकॉर्ड गायब है। जिसके चलते फंड एवं ग्रेजुएटी का धन प्राप्त नहीं हो सका है।