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कैनवास पर भरे कल्पना के रंग, बोल उठे चित्र

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बलिया। उप्र राज्य ललित कला अकादमी लखनऊ की ओर से चल चले ग्रीष्मकालीन चित्रकला कार्यशाला के बाद तीन दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी का समापन राजकीय इंटर कालेज के सभागार में किया गया। प्रदर्शनी के अंतिम दिन साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं रंगमंच से जुड़े कलाकारों की भीड़ रही। वहीं, अभिभावक भी अपने बच्चों की पेंटिंग की प्रदर्शनी देखने के लिए सुदूर ग्रामीण अंचलों से आए हुए थे। समापन कार्यक्रम के दिन बच्चों एक दूसरे से न चाहते हुए फिर मिलने के वादे के साथ जुदा हुए।
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चित्रकला प्रदर्शनी को देखने के लिए आए रसड़ा एसडीएम आईएएस विपिन कुमार जैन एवं बांसडीह की एसडीएम व आईएएस अन्नपूर्णा गर्ग ने बच्चों की बनाई गई एक-एक पेंटिंग का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान कलाकृतियों पर अपने तूलिकाओं का रंग सजाने अर्थ समझा। उन्होंने कला प्रशिक्षक डॉ. इफ्तेखार खां ने एक-एक बारीकियों को समझाया। कहा कि कला कृतियों के माध्यम से हम लोगों को बहुत कुछ समझाने का प्रयास करते हैं। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय ने कहा कि चित्र तो स्थिर है फिर भी बोल रहे हैं।
इस मौके पर वरिष्ठ पर्यावरणविद डॉ. गणेश पाठक, यशवंत सिंह, डॉ. राजेंद्र भारती, रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी, मोहन श्रीवास्तव, संजय मौर्य, अजीत कुमार दूबे, नंदिनी तिवारी, डॉ. संजय त्रिपपाठी, डॉ. दिव्या मिश्रा, अरविंद मोहन आदि ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए बच्चों की पेंटिंग को सराहा। इस दौरान अतिथियों ने नवांकुरों के चित्रों का अवलोकन करनें के बाद उनकी सराहना करते हुए इस कार्यशाला के व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. इफ्तेखार ने बताया कि इस कार्यशाला में ग्रामीण क्षेत्रों मनियर, रसड़ा, नगरा, सहतवार आदि के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कला सीखा है। इस मौके पर कला प्रशिक्षक नुरुल हक, हरिशंकर प्रसाद, नौशाद अंसारी, वैष्णवी मिश्रा, बुशरा शाहीन की कला की सराहना अतिथियों ने की। समापन कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेंद्र भारती ने किया।
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