बलिया। जिले में पशु आश्रय स्थलों के निर्माण और अस्थायी पशु आश्रय स्थलों में छुट्टा पशुओं के चारे के नाम पर की गई गड़बड़ी मामले में जल्दी ही संबंधित आरोपियों पर गाज गिर सकती है। मामला संज्ञान में आने के बाद पशुधन विभाग के विशेष सचिव एके सिंह ने 16 मई को पशु आश्रय स्थलों की जांच की थी। उनकी जांच रिपोर्ट पर शासन स्तर से जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। इसको लेकर पशु पालन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची है।
पशु आश्रय स्थलों में चारे के नाम पर गोलमाल का मामला अमर उजाला में 12 मई के अंक प्रकाशित हुआ था। इसके बाद मामले को शासन ने संज्ञान में लिया। इसके बाद पशुधन विभाग के विशेष सचिव एके सिंह 16 मई को आए और कई पशु आश्रय स्थलों का निरीक्षण भी किया। विशेष सचिव के शासन को जांच रिपोर्ट सौंपते ही गड़बड़ी की आरोपियों पर कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि करीब साढ़े तीन माह पहले पहले मुख्यमंत्री ने स्थायी और अस्थायी पशु आश्रय स्थल बनाकर उसमें छुट्टा पशुओं को रखने का निर्देश दिया था। पशुओं के चारे आदि के लिए धनराशि भी दी गई। इसके बाद भी पशुओं की देखरेख नहीं हो पाई और कुछ पशु आश्रय स्थलों पर मवेशियों की मौत हो गई। पशुपालन विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में बने कुल 45 अस्थायी पशु आश्रय स्थलों के लिए 1807400 रुपये व शहरी क्षेत्रों में स्थापित 10 पशु आश्रय स्थलों के लिए 477000 रुपये की धनराशि भेजी गई है। नगरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत रघुनाथपुर में अस्थाई पशु आश्रय स्थल 107 छुट्टा बछड़े रखे गए थे। जब चारा व पानी के अभाव में आधे दर्जन बछड़े मर गए और इसका खुलासा हुआ तो डीएम मौके पर पहुंचे और बीडीओ व पशुपालन विभाग को निर्देश दिए। लेकिन इसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ और बछड़ों की मौत लगातार जारी रहा।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय श्रीवास्तव शासन के निर्देश पर 16 मई को विशेष सचिव पशुधन जिले में आए थे। उन्होंने कई पशु आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया था। वे नगरा के रघुनाथपुर स्थित पशु आश्रय स्थल भी गए थे और जांच की थी। विशेष सचिव की ओर से शासन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।