बलिया। जिले में यूरिया को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। अधिकांश इलाकों के सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है तो दूसरी ओर बाजारों में अधिक दामों पर बेचा जा रहा है। इसके चलते किसानों की परेशानी बढ़ गई है। आलम यह है कि रबी फसलों की सिंचाई के बाद किसान यूरिया के लिए भटक रहे हैं और दुकानदार इस कमी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारी की मानें तो पिछले साल के सापेक्ष कम यूरिया आने के कारण इस तरह की परेशानी आई है जो एक-दो दिनों में सामान्य हो जाएगी।
रबी में गेहूं की बुआई आमतौर पर 15 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच की जाती है। बुआई के बाद 21 से 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जाती है और प्रत्येेक सिंचाई के बाद गेहूं की फसल को स्वस्थ रखने व पैदावार सही प्राप्त करने के लिए यूरिया के साथ ही अन्य छिड़काव किया जाता है। अधिकांश किसानों ने गेहूं की सिंचाई तो कर दी लेकिन अब यूरिया के नहीं मिलने के कारण वह परेशान हैं। बताया जाता है कि जिले के अधिकांश सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं मांग को देखते हुए दुकानदार भी मनमानी रेट पर यूरिया बेच रहे हैं। आलम यह है कि फसलों को बचानेे लिए किसानों को मुंहमांगा दाम देकर यूरिया खरीदना पड़ रहा है। जिला कृषि अधिकारी की मानें तो जिले के लिए निर्धारित 34 हजार मी.टन के सापेक्ष अब तक केवल 15 हजार मी. टन यूरिया ही मिली और इसके चलते ही इस तरह की परेशानी आई है। बताया कि पिछले साल इस समय तक कुल 22 हजार मी. टन यूरिया जनपद को मिल चुकी थी। कहा कि बफर गोदाम में उपलब्ध 800 मी.टन यूरिया को समितियों पर भेजा जा रहा है और आज रात तक 3145 मी. टन की रैक जनपद में पहुंच जाएगी। बताया कि रैक लगते ही यूरिया को सीधे समितियों पर भेजा जाएगा ताकि किसानों को यूरिया मिल सके।
इस बाबत प्रभारी जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष कम यूरिया मिलने के कारण दिक्कत आई है, आज रात तक यूरिया की खेप पहुंच जाएगी और एक-दो दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। अधिक दर पर यूरिया बेचने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।