बलिया। कार्तिक पूर्णिमा स्नान के दिन से शुरू ऐतिहासिक ददरी मेले में रविवार के बाद सोमवार को भी भारी भीड़ उमड़ी। लोग परिवार संग मेला देखने पहुंचे और जमकर आनंद लिए। मेले में भीड़ देख दुकानदारों के चेहरे खिले नजर आए। बच्चे मनोरंजन के सामान, झूला, सर्कस, व मौत का कुआं देखने में तो महिलाएं शृंगार और घरेलू सामान की खरीदारी में व्यस्त दिखी। इसके साथ ही मेले में आए लजीत व्यंजनों का भी लोगों ने स्वाद चखा।
मेला परिसर में सुबह दस बजते-बजते ग्रामीण इलाका से लोग टोली में मेले में पहुंचना शुरू कर दिए थे। दुकानदार भी अपनी-अपनी दुकानों को जल्द ही सजाकर तैयार कर लिए थे। चर्खी और झूला देर रात तक चलती रही। इस दौरान इसमें सवार होकर युवा वर्ग भी खासा रोमांचित दिखे। वहीं, शाम होते-होते नगरवासियों की भीड़ मेला परिसर में उमड़नी शुरू हो गई। मेला इंचार्ज विवेक पांडेय सदलबल मेला परिसर में चक्रमण करते नजर आए। ददरी मेले में नगरपालिका की उदासीनता का आलम यह है कि शुक्रवार से शुरू मेले में सोमवार को भी कुछेक दुकानदार दुकान लगाते नजर आए। बताया जाता है कि पहले दुकानों के लिए जमीनों का टेंडर कराने का निर्णय चेयरमैन ने लिया। बकायदा इसकी सूची भी प्रकाशित कराई गई। टेंडर की तिथि तय की गई। अचानक कार्तिक पूर्णिमा स्नान के दो दिन पहले निर्णय बदल दिया गया और पिछले सालों की तर्ज पर जगह आवंटित करने का फैसला ले लिया गया। इसके चलते जो दुकानें कार्तिक पूर्णिमा तक पूरी तरह सज जाती थी, उनका अब तक अतापता नहीं है। तमाम इलाके खाली पड़े हैं। जिन दुकानों को जगह मिली भी है, वहीं देरी के चलते अब तक सज नहीं सकी है।
गंदगी के चलते दुकानदार परेशान
बलिया। मेला परिसर में मिट्टी के ढेर और गंदगी से दुकानदार अस्त-व्यस्त दिखे। दुकानदारों का कहना है कि वे अपने स्तर से अपनी दुकान के बाहर तथा परिसर में गंदगी तो साफ कर दे रहे हैं। लेकिन गंदगी को नियमित तौर पर उठाकर मेले के बाहर रखने का प्रबंध अभी तक किसी ने नहीं किया गया। नतीजतन ऐसी समस्या उत्पन्न हो रही है।
चेतक प्रतियोगिता आज, 25 घोड़े लेंगे हिस्सा
बलिया। ददरी मेले के नंदीग्राम में हर साल की भांति इस वर्ष भी आज यानी मंगलवार चेतक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। बैरिकेडिंग का कार्य तथा ग्राउंड बनाने का कार्य युद्धस्तर पर है। इस बार प्रतियोगिता में अजय सिंह बक्सर को घोड़ा कालू, साधु और चंद्रशेखर पहलवान गोरखपुर का घोड़ा और बकसू बाबा धाम नकदीलपुर गाजीपुर का घोड़ा फतेह और मोतिहारी, पूर्वी चंपारण बिहार का घोड़ा, भगवान सिंह मुखिया आरा बिहार का घोड़ा, लाल बादशाह और राधे राय वैशाली का घोड़ा राजा सहित अन्य घोड़े भाग लेंगे। इसमें लगभग 25 घोड़े हिस्सा लेंगे।