बलिया। जल निगम में बिना काम कराए सर्फेस वाटर योजना के सर्वे के नाम पर किए गए 19.20 लाख के भुगतान की जांच शुरू हो गई है। शासन के निर्देश पर डीएम ने जल निगम के अधिशासी अभियंता से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। शहर के निवासी राकेश कुमार ने इसकी शिकायत नगर विकास विभाग के प्रमुख से शिकायत की थी। इसका खुलासा अमर उजाला ने 26 सितंबर के अंक में किया था।
शहर के निवासी राकेश कुमार ने 22 अक्टूबर को नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को शिकायती पत्र देकर बताया कि जिले में वर्ष 2015-16 में सर्फेस वाटर योजना को लागू किया गया और विभाग की ओर से सर्वे आदि का काम पूरा कर करीब 800 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजा गया। इसके तहत नदी से पानी लेकर उसे फिल्टर के माध्यम से शुद्ध करके पानी टंकी के जरिये घरों में आपूर्ति करने की थी। लेकिन दो साल बाद बाद 27 अगस्त 2018 एक एजेंसी व उसके डाइरेक्टर को 19 लाख 20 हजार 190 रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसमें मेसर्स टेक्नो विजडम कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड को सर्वे के लिए 13 लाख 62 हजार 436 रुपये व इसी एजेंसी के डाइरेक्टर महेंद्र सहाय के नाम से पांच लाख 57 हजार 754 रुपये का भुगतान किया गया है। राकेश ने इस मामले की जांच कराकर सरकारी धन का बंदरबांट करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। 24 अक्टूबर को प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी से इस मामले में जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। डीएम ने भी 25 अक्टूबर को शिकायती पत्र को जल निगम के अधिशासी अभियंता को भेजते हुए जांच कर आख्या देने को कहा है। इसको लेकर जल निगम में खलबली मची हुई है।