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सालों बाद भी ई-डिस्ट्रिक्ट के नियमों का पालन नहीं!

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बलिया। सालों बाद भी जिले में ई-डिस्ट्रिक्ट के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। निर्धारित समय से अधिक दिनों तक आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र के आवेदन लटके रहते हैं। खासकर लेखपालों की लापरवाही के कारण यह व्यवस्था परवान नहीं चढ़ रही है।
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वर्ष 2012 में शासन की ओर से आठ विभागों की 26 सेवाओं को ऑनलाइन करते हुए ग्रामीणों की सुविधा के लिए गांवों में जनसेवा केन्द्रों का संचालन कराया गया। इस योजना के तहत गांवों में स्थित जनसेवा केन्द्रों से सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और अधिकारियों की ओर से एसएसडीजी (स्टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे) के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी करने का इंतजाम किया गया। इसके बाद संबंधित जनसेवा केन्द्र की ओर से प्रमाण पत्र आदि करने की व्यवस्था की गई। जनसेवा केन्द्रों के संचालन के लिए सरकार की ओर से सेवा प्रदाता एजेंसी का भी निर्धारण किया गया और इनके माध्यम से जिले में कुल 540 जनसेवा केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2015 में जिले को पेपरलेस करने के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट योजना में शामिल किया गया और जनसेवा केन्द्रों से मिलने वाली सभी सुविधाओं को भी ई-डिस्ट्रिक्ट सर्वर से जोड़ दिया गया। इसके तहत प्रत्येक कार्यों के निस्तारण के लिए समय सीमा का भी निर्धारण किया गया। प्रावधान किया गया कि किसी भी प्रमाण पत्र का निस्तारण अधिकतम 15 दिनों में हो जाए और ऐसा नहीं होने पर जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के वेतन से कटौती की जाए। लेकिन इसका कभी पालन नहीं किया जाता है। आलम यह है कि निर्धारित समय से अधिक दिनों तक लेखपालों की साइट पर आवेदन पड़े रहते हैं और निस्तारण नहीं किया जाता है। ई-डिस्ट्रिक्ट सेवा के तहत राजस्व विभाग की चार सेवाएं देने की व्यवस्था है। इसमें आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र तथा खतौनी की नकल सेवा है। खासकर आय, जाति तथा निवास प्रमाण पत्र की आवश्यता आम लोगो को किसी न किसी काम के लिए होती है। बतौर उदाहरण सदर तहसील के सोहांव ब्लाक के कई लेखपालों के यहां पिछले 18 दिनों से आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र के आवेदन लंबित हैं। हैरानी की बात है कि इसको लेकर सदर तहसील के अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं।
इनसेट...
ई-डिस्ट्रिक्ट के तहत किसी भी प्रमाण पत्र के आवेदनों को 15 दिनों में निस्तारित किया जाना है। खासकर आय, जाति व निवास प्रमाण पत्रों के आवेदन एक सप्ताह में ही निस्तारित करने का प्रावधान है, हालांकि विशेष स्थितियों में ही अधिकतम 15 दिनों में करना है। इस मामले की रिपोर्ट तहसीलों से मंगाई जाएगी और लापरवाही करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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मनोज सिंघल
एडीएम, बलिया
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