बैरिया। कभी दरवाजे के सामने पेड़ पर रस्सी लगाकर झूला झूलने वाली युवतियां हाथ पीला होने के बाद धनुष यज्ञ मेला में झूलों पर झूलकर बचपन की यादों को ताजा कर रही हैं। ऐसी छोटी सी उम्र में बचपन से साथ में खेलने कूदने के बाद अचानक वैवाहिक सूत्र में बंध कर ससुराल पहुंचने वाली नई नवेली दुल्हन जब ससुराल पहुंचती है तो वहां उसे मायके में साथ रहे सखी सहेलियों से मिलने का मन करता है। ऐसे नई नवेली दुल्हनों के लिए संत शिरोमणि सुदिष्ट बाबा का धनुष यज्ञ मेला जरिया बन गया है।
सुदिष्टबाबा के समाधि के बगल में शिवजी का मंदिर है, उक्त मंदिर पर ससुराल व मायके के लोगों का मिलन हो रहा है, मंदिर पर घंटों बैठकर अपने बचपन की यादों को ताजा किया जा रहा है। इसके बाद झूलों पर झूलकर बचपन में रस्सी पर झूले यादों को ताजा कर रही है। साथ में मेले का मशहूर प्रसाद जलेबी संग सब्जी का स्वाद चखा जा रहा है तो इन युवतियों को केवल जलेबी, मिठाई से काम कैसे चल सकता हैं, छोले, मैगी, चाऊमीन आदि व्यंजनों का स्वाद भी चखा जा रहा है, इसके बाद मीनाबाजार में जमकर सौंदर्य सामग्री की खरीददारी की जा रही है। युवतियों को नौटंकी, मौत का कुआं, ड्रेगन खूब भा रहा है। इसके अलावा मेला में पहुंची युवतियां गिफ्ट की दूकानों में पहुंचकर केट्टू व विभिन्न डिजाइनों की सजावट समाग्री की खरीद्दारी कर रही है। जगह-जगह मेले में सेल्फी लेते भी देखा जा रहा है। मेला घूमने के बाद बिछुड़ते समय एक बार आंखों में आंसू लिए घर वापसी हो रही है। सुरक्षा के दृष्टि से मेला अध्यक्ष पूर्व प्रधान व प्रधान पति गौरीशंकर प्रसाद ने अपने ग्राम पंचायत सदस्यों को सुरक्षा दस्ता के रूप में तैनात किए हुए हैं।