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जनप्रतिनिधियों को भी वापस बुलाने का अधिकार मिले

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दुबहर। क्षेत्र में मुंह बाए समस्याओं के कोई सार्थक निदान नहीं दिखाई देने पर क्षेत्र के लोगों में अपने जनप्रतिनिधियों के प्रति अविश्वास की भावना बढ़ती जा रही है । क्षेत्र के लोगों ने मंगलवार को बैठक कर क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर चर्चा की। ऐसे जनप्रतिनिधियों के संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारत के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और निर्वाचन आयोग से यह मांग किया है कि एक ऐसा कानून बने, जिसमें भारत की जनता को चुने हुए जनप्रतिनिधियों को भी वापस बुलाने का अधिकार मिल सके।
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क्षेत्र के अखार निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य अरुण सिंह ने कहा कि जो जनप्रतिनिधि लोकतंत्र के भावनाओं के अनुरूप जनता के सुख-दुख में तथा उनके विकास कार्यों में रुचि न ले । जनता से दूरी बनाए रखे ऐसे जनप्रतिनिधियों को लोकसभा और विधानसभा में भेजने का कोई मतलब नहीं रह जाता । ऐसे लोगों को कानून बनाकर वापस बुलाने का अधिकार जनता को हर हाल में मिलना चाहिए।
मंगल पांडे विचार मंच के अध्यक्ष कृष्णकांत पाठक ने कहा कि ऐसा कोई भी विधान सभा लोक सभा का क्षेत्र नहीं होगा जहां बाढ़ सूखा बिजली आग से तबाही नहर में पानी जैसी भयानक समस्याएं मुंह बाए खड़ी नहीं हों । लेकिन जनप्रतिनिधियों द्वारा इन गम्भीर समस्याओं पर भी रुचि ना लेने के कारण समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है । ऐसे में लोगों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों का होना ना होना एक समान है। तो क्यों नहीं जनता को इन्हें वापस बुलाने का ही अधिकार प्राप्त हो जाए ।
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दुबहर निवासी अंजनी सिंह ने कहा कि बड़ी उम्मीद के साथ लोग लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होकर अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं । लेकिन वही प्रतिनिधि दरवाजे पर जाने के बाद मुलाकात करने से मना कर देते हैं। तो सारी अपेक्षाएं धरी की धरी रह जाती हैं । कहा कि अकेले दुबहर गांव में दुर्गा मंदिर तक जाने के लिए रास्ता वर्षों से खराब है । लेकिन क्षेत्र के पंचायत से लेकर के लोकसभा के प्रतिनिधि तक किसी को इसकी सुधि नहीं है।
रामपुर निवासी हरेंद्र सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है लेकिन काम इसके उल्टे हो रहे हैं । जनता के द्वारा चुने हुए नुमाइंदे शासन सत्ता के सुख भोगने में ही अपनी गरिमा समझते हैं । जनता जनार्दन किस रूप में अपना जीवन व्यतीत कर रही है इसका हिसाब किताब लेने वाला कोई नहीं है। जनता को भी जनप्रतिनिधियों का हिसाब किताब लेने का अधिकार यानि उन्हें वापस बुलाने का अधिकार मिलना ही चाहिए ।
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