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फिर बढ़ने लगा घाघरा का जलस्तर

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बेल्थरारोड । घाघरा नदी के जल स्तर में एक बार फिर बढ़ने लगा है। पिछले कई दिनों तक जल स्तर घटने के बाद अब पुन: जल स्तर में वृद्धि शुरू हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, बुधवार को दोपहर जलस्तर 63.240 मीटर दर्ज किया गया जो लाल निशान से 77 सेंटीमीटर कम है। आयोग की मानें तो अपराह्न तक जलस्तर स्थिर रहने के बाद एक- एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि शुरू हो गई जो देर शाम तक जारी रहा। जल स्तर में वृद्धि शुरू हो जाने से एक बार फिर बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। इसके साथ ही तटवर्ती चैनपुर, गुलौरा, मठिया, खैरा, सहियां आदि स्थानों पर कटान भी हो रही है । कृषि योग्य भूमि कटकर नदी की जलधारा में विलीन हो रही है । इसको लेकर तटवर्ती वाशिंदों में हड़कंप मचा हुआ है। कटान रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने पर लोगों में घोर नाराजगी है ।
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जयप्रकाशनगर। विकास खंड मुरलीछपरा क्षेत्र के इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) पंचायत जो विगत एक दशक से घाघरा कटान से लगातार तबाह होते जा रहा है। लेकिन इसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम आज तक नहीं हो सका है। अनदेखी का ही नतीजा रहा कि इस गांव से तीन किमी दूर बहने वाली घाघरा नदी वर्ष 2013 में किसानों के खेतों को अपने गर्भ में समाहित करते हुए, गांव से सटकर बहने लगी । इस पंचायत में घूरी टोला, दलेल टोला, देवदत्त पाण्डेय के टोला, शिवनारायन टोला, नवका टोला, सुफल टोला, छक्कू टोला, रामेश्वर टोला सहित कुल आठ पुरवे हैं । इनमें छक्कू टोला, नवका टोला, बड़का सुफल टोला आदि के लगभग 350 घरों को घाघरा 2014 के अंत तक पूरी तरह निगल गई । गांव की आधी आबादी का सफाया होने के बाद 2015 से यहां कटानरोधी कार्य का सिलसिला शुरू हुआ। विभागीय लोगों के मुताबिक इस गांव में कटानरोधी कार्य के लिए 17 करोड़ एक लाख के प्रोजेक्ट से ही बीते वर्ष 2015 में भी कार्य हुआ था। इस साल भी उसी प्रोजेक्ट से डैमेज वर्क कराया जा रहा है।
इनसेट=
कटानरोधी कार्य से ग्रामीण असंतुष्ट
जयप्रकाशनगर। इब्राहिमाबाद नौबरार में चल रहे कटानरोधी कार्य से इस गांव के लोग संतुष्ट नहीं हैं। गांव के लोगों के अनुसार इस तरह के कार्य से गांव का कुछ भी भला नहीं होने वाला । कटान स्थल पर मौजूद इस गांव के निवासी मंटू सिंह, मुन्ना यादव, वीरेंद्र यादव, कृष्णा यादव आदि ने कटानरोधी कार्य पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि यहां सबकुछ मनमाने ढंग से पहले भी किया जाता था, अभी भी वही हाल है । विभागीय लूट-खसोट का ही देन है कि इस गांव के 90 फीसदी किसान भूमिहीन हो गए। 350 से अधिक मकान भी घाघरा में समाहित हो गए। अभी के समय में हालात तो और भी बेकाबू हैं। घाघरा यहां करीब छह किमी में लगातार जमीनों को निगलते हुए, बीएसटी बांध से सटने को आतुर है। एक आकलन के मुताबिक अब घाघरा कटान से बीएसटी बांध की दूरी महज 45 मीटर रह गई है। वहीं विभाग की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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