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शिव सती का मार्मिक प्रसंग सुन श्रद्घालु हुए भाव विह्वल

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बलिया। मां बघौची देवी सेवा संस्थान गायघाट मुड़ाडीह में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। सैकड़ों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु नर-नारियों से शिव-सती की था सुनी। इस मौके पर व्यास पीठ से श्रद्धालु भक्तों को शिव-सती का प्रसंग सुनाते हुए राजनजी महाराज ने शुक्रवार कथा में शिव महिमा तथा श्रीराम नाम का वर्णन किया।
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महाराज ने बताया कि श्री सती के पिता महाराजा दक्ष प्रजापति के लिए विशाल यज्ञ करवाए। लेकिन इस यज्ञ में शिव तथा सती को निमंत्रित नहीं किया था।इससे सती ने स्वामी शिव भगवान के लाख मना करने पर भी यज्ञ में शामिल होने चली गई। लेकिन वहां पर ब्रह्मा, विष्णु तथा सभी देवताओं को देखने के उपरांत अपने स्वामी शिव का स्थान न पाकर सती जी क्रोधित होकर यज्ञ कुंड में अपनी आहुति दे दी। सती जी अगले जन्म में हिमालय की पुत्री के रूप में पैदा हुई। पार्वती की मां का नाम मैना था। पार्वती ने शिव-शंकर की कठिन तपस्या कर शिव के दर्शन किए, फिर शिव को पति रूप में माना और शिव-पार्वती का विवाह हुआ। इस कथा को सुनकर श्रद्धालु भक्तों ने ज्ञान का अर्जन किया। इस मौके पर आयोजक रमेश कुमार मिश्र, अनिल सिंह, समाजसेवी विनोद कुमार तिवारी, भिखारी गिरी, देव कुमार पांडेय, कपिल पांडेय, दारोगा सिंह आदि मौजूद रहे।
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