बलिया। जनपद में सड़कों पर चलने वाले सवारी वाहनों में 60 फीसदी डग्गामार हैं। जनपद के राष्ट्रीय राजमार्गो समेत विभिन्न मार्गों पर बिना रोक टोक इनका संचालन हो रहा है। जब कोई घटना या दुर्घटना होती है तो जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के साथ ही परिवहन विभाग चेतता है।
जनपद में सबसे ज्यादा डग्गामार वाहन बलिया-बेल्थरारोड वाया सिकंदरपुर, बलिया-रसड़ा, बलिया-बैरिया, बलिया-बक्सर, बलिया-गड़वार सहित जनपद के अन्य कई मार्गों पर सबसे ज्यादा चलते हैं। इन मार्गों पर सरकारी बसें उपलब्धता न होने पर डग्गामार वाहन सवारियों को ठूस कर चलते रहते हैं। इन वाहनों में खासकर बस, कमांडर, जीप, टेंपो, कार आदि वाहन शामिल है। सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को उस समय होती है, जब उन्हें बलिया से बक्सर की यात्रा करनी होती है। खासकर इस मार्ग पर सबसे पुरानी एंबेस्डर कारों और जीपों का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे राजस्व का नुकसान तो होता ही है, वहीं यात्रियों के जीवन के साथ खिलवाड़ भी होता है। इस तरह से देखा जाय तो जनपद के देहात क्षेत्र के मार्गो पर चलने वाहन काफी जर्जर एवं पुराने है। जो दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। इन डग्गामार वाहनों के कारण आए दिन कहीं ना कहीं सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। विभागीय आकड़ों पर गौर करे तो जनपद में डग्गामार वाहन नाम मात्र के है। जबकि धरातल पर देखा जाय तो 50 से 60 फीसदी वाहन डग्गामार वाहन संचालित हो रहे है। इस बाबत एआरटीओ आंजनेय सिंह ने बताया कि डग्गामार वाहनों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। बताया कि तीन दिन के अंदर डग्गामार करीब 50 वाहनों के विरुद्घ कार्रवाई की गई है।