बलिया। किसानों की आय दोगुनी करने को लेकर जिले भर में किसान पाठशाला, मेला व किसान दिवस का आयोजन किया जाता है। लेकिन यह कवायद धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर पा रही है और अधिकारी भी कोरम कर अपने कर्तव्य की पूर्ति कर ले रहे हैं। इन कार्यक्रमों का प्रचार प्रसार माकूल नहीं होने के कारण किसानों को इसका भरपूर लाभ नहीं मिल पाता है।
किसानों की आय दुगुनी करने के लिए सरकार की ओर से कई तरह की योजनाएं संचालित की जाती हैं लेकिन अधिकांश योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। करीब दो सालों से जिले में किसान पाठशाला, किसान मेला व जिला मुख्यालय पर किसान दिवस का आयोजन किया जाता है। वर्तमान में जिले के 162 न्याय पंचायतों के दो-दो गांवों किसान पाठशाला का संचालन किया जा रहा है। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि किसान पाठशालाओं में जानकारी के अभाव में किसान नहीं पहुंच पाते हैं। किसानों की मानें तो यह कवायद केवल कागजी कोरम बन कर रह गया है।
सोहांव के किसान रामनंदन ने बताया कि किसान पाठशाला कब और कहां आयोजित होगी इसकी जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से नहीं दी जाती है, लिहाजा किसान इससे वंचित रह जाते हैं। नारायनपुर गांव के किसान संतोष राय ने बताया कि सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाएं अधिकारियों की उदासीनता का शिकार हो गई है और किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पाता है। यह भी कहा कि किसानों की आय दुगुनी करने के लिए किसान मेला लगाया जाता है लेकिन यह भी केवल कोरम बन कर रह गया है और जिला मुख्यालय पर किसान दिवस तो केवल खानापूर्ति बन कर रह गई है।