फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वनकर्मियों की हड़ताल पर पर्दा डाल रहा विभाग! र

विज्ञापन
विज्ञापन
बलिया। अक्तूबर माह में बैरिया में वन दारोगा और विधायक के बीच हुए विवाद के बाद वन कर्मियों के हड़ताल पर जाने का मामला हवा हवाई साबित हुआ है। एक सप्ताह तक कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन के साथ आंदोलन किया गया था। लेकिन आरटीआई से मांगी गई सूचना में वन विभाग ने किसी ऐसी हड़ताल से इंकार कर दिया।
विज्ञापन

अक्तूबर के पहले सप्ताह में बैरिया में वन दारोगा और विधायक सुरेंद्र सिंह के बीच विवाद हुआ था। विधायक ने जहां वनकर्मियों पर अवैध वसूली करने का आरोप लगाया था, वहीं एक वन दरोगा ने विधायक समेत अन्य लोगों पर मारपीट करने व पैर तोडने का आरोप लगाया था। इसको लेकर वन विभाग के सभी कर्मियों ने लामबंद होते हुए विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर आठ अक्बूबर से कलेक्ट्रेट में धरना शुरु कर दिया था। हालांकि 17 अक्तूबर को दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर मामला शांत हो गया। इस प्रकरण को लेकर जीराबस्ती गांव निवासी नवीन कुमार राय ने सूचना अधिकार के तहत 23 अक्तूबर को वन विभाग के प्रभागीय निदेशक से जानकारी मांगी कि विधायक सुरेंद्र सिंह के साथ हुए विवाद में आपके कार्यालय के कितने कर्मचारी किस दिनांक से हड़ताल पर रहे। यह भी पूछा था कि हड़ताल की जानकारी प्रशासन को दी गई थी? क्या हड़ताली कर्मचारियों के वेतन का भुगतान हुआ है?
प्रभागीय निदेशक की ओर से उन्हें 30 नवंबर को सूचना भेजी गई कि उक्त प्रकरण में उनके कार्यालय का कोई भी कर्मचारी हड़ताल पर नहीं था। हैरानी की बात है कि यह प्रकरण जिले में कई दिनों तक गर्म रहा और वनकर्मियों के धरना में जिलेभर के वनकर्मियों के अलावा संगठन प्रांतीय स्तर तक के पदाधिकारी भी पहुंचे थे। करीब एक सप्ताह बाद मामला शांत हुआ था।
विज्ञापन


कोट
प्रभागीय निदेशक कार्यालय का कोई कर्मचारी हड़ताल पर नहीं था, फील्ड के कर्मचारी हड़ताल पर थे। हड़तालियों ने प्रभागीय निदेशक कार्यालय में तालाबंदी की थी लेकिन कर्मचारी किसी तरह काम करते रहे।
विज्ञापन

रविशंकर बाजपेई, एसडीओ, वन प्रभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें