बलिया। ठंड और गलन के मद्देनजर अधिकांश विद्यालयों में बच्चे नहीं पहुंचे। कुछ विद्यालय खुले तो बच्चों के नहीं पहुंचने से शिक्षक भी दोपहर में ही निकल लिए। आलम यह रहा कि जिला प्रशासन के अड़ियल रवैए के बाद शिक्षक संघ ने आपत्ति जताई थी। बीएसए कार्यालय परिसर में चलने वाले स्कूलों पर भी ताला लटका रहा। न तो शिक्षक ही आए और न ही छात्र।
सोमवार को जिला प्रशासन ने स्कूलों को खोलने का निर्देश जारी किया था। इसके बाद शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने प्रभारी जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर 10 जनवरी तक ठंड के मद्देनजर स्कूलों को बंद करने की मांग रखी थी। साथ ही कहा था कि अगर जिला प्रशासन स्कूलों को बंद नहीं कराता है तो हम खुद स्कूल नहीं जाएंगे। इसके चलते जिले के अधिकांश प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं खुले। अमर उजाला की टीम ने इसकी पड़ताल की तो पाया कि बीएसए कार्यालय परिसर में ही स्कूल चलते हैं जो पूरी तरह से बंद मिले। वहीं विशुनीपुर स्थित आजाद प्राथमिक विद्यालय में दो शिक्षक दिखे, जो बच्चों के आने का इंतजार पूरे दिन करते रहे। उनका कहना था कि ठंड में खुद को बचाने के लिए कुछ भी अलाव की व्यवस्था नहीं है। वहीं भृगुआश्रम, जापलिनगंज, नया बजीरापुर स्थित विद्यालयों में भी यही स्थिति रही। शिक्षक संघ के आह्वान के समर्थन में विशिष्ट बीटीसी बेलफेयर एसोसिएशन और समयोजित शिक्षकों ने स्कूलों को बंद रखा।
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स्कूल के बच्चों की जिम्मेदारी ले प्रशासन
बलिया। बीआरसी हनुमानगंज के सभाकक्ष मेें शिक्षक संगठनों की संयुक्त बैठक सोमवार को आयोजित की गई। जिसमें मांग किया गया कि कड़ाके की ठंड को देखते हुए प्रदेश के अधिकांश जिलों में कक्षा एक से आठ तक के स्कूल बंद कर दिए गए है। ऐसे में यहां पर भी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को देखते हुए बंद करने का आदेश निर्गत किया जाय। चेतावी भी दी गई है कि अगर कहीं भी किसी बच्चे को स्कूल में पढ़ाई के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस मौके पर प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अवधेश सिंह, सीनियर बेसिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रवींद्र सिंह, घनश्याम चौबे, धीरज राय, राधेश्याम पांडेय, ओमप्रकाश यादव, अजय मिश्र मौजूद रहे।