बलिया। जिले के पशु अस्पतालों में चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी के कारण मवेशियों के इलाज व टीकाकरण का काम सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा। इसके चलते जहां किसान परेशान हैं, वहीं सरकारी योजनाएं भी परवान नहीं चढ़ पा रहीं। जनपद में कुल 57 पशु अस्पताल हैं, जिनमें महज 31 पर चिकित्सक तैनात हैं। शेष 26 चिकित्सालय बिना डॉक्टर के चल रहे हैं। यही नहीं, 52 के सापेक्ष 23 पशुधन प्रसार अधिकारियों के पद भी कई वर्षों से रिक्त चल रहे हैं।
जिले में पशुओं के इलाज और टीकारण के लिए कुल 57 चिकित्सालय स्थापित किए गए हैं जबकि एक सचल पशु अस्पताल संचालित हैं। प्रत्येक पशु अस्पताल में एक पशु चिकित्साधिकारी का पद सृजित है लेकिन वर्तमान में सिर्फ 31 पर ही तैनाती है। 26 अस्पतालों में चिकित्सक के पद रिक्त हैं। इसके अलावा जिले में 40 पशुु सेवा केंद्र भी संचालित हैं लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण यहां भी पशुओं के इलाज की सुविधाएं नहीं मिल पातीं। इतना नहीं पशुपालन को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं को पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए 52 पशुधन प्रसार अधिकारी का पद सृजित हैं लेकिन कई वर्षों से 23 पद रिक्त चल रहे हैं। इनके अलावा तीन उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, तीन फार्मासिस्ट और मुख्य पशुधन अधिकारी का पद भी रिक्त है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी के कारण पशुओं के इलाज व टीकाकरण का काम प्रभावित हो रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक मिश्र ने बताया कि जिले में पशु चिकित्साधिकारियों और कर्मचारियों की कमी चल रही है। इस बाबत शासन को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। शासन स्तर से ही तैनाती की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।