बलिया। जिलाधिकारी की ओर से 196 ग्राम पंचायतों के प्रधान, सचिव तथा रोजगार सेवक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विभाग में खलबली मची है। कार्रवाई की जद में 196 प्रधान और रोजगार सेवक के अलावा करीब 31 सचिव भी आएंगे। उधर, डीएम के निर्देश पर संबंधित गांवों के सचिवों को चिह्ति करने का काम अलग-अलग विभागों की ओर से किया जा रहा है।
मनरेगा के वित्तीय वर्ष 2017-18 में तीन माह बीत जाने के बाद भी जिले के 196 गांवों में एक भी मानव दिवस का सृजन नहीं किया गया है। इसको लेकर डीएम सुरेन्द्र विक्रम की ओर से संबंधित बीडीओ को अप्रैल से जून महीने तक रोजगार सेवकों को मानदेय रहित करने तथा प्रधान तथा सचिव पर एक हजार का दंड निर्धारित कर वसूली का निर्देश दिया गया है। इसको लेकर सभी ब्लाकों तथा संबंधित ग्राम पंचायतों में खलबली मची है। बताया जाता है कि प्रधानों तथा रोजगार सेवकों की संख्या तो 196 है लेकिन सचिवों की संख्या करीब 31 है। बताया जाता है कि एक सचिव के पास औसत चार गांव के अधिक का कार्यभार है। हालांकि कुछ गांवों में नवनियुक्त सचिवों की तैनाती की गई है लेकिन वह जून महीने के बाद की गई है, लिहाजा इसके लिए पूर्व के सचिव ही दोषी माने जाएंगे। इसके अलावा किसी गांव में ग्राम पंचायत अधिकारी सचिव का कार्य कर रहे हैं तो किसी गांव में ग्राम विकास अधिकारी को सचिव बनाया गया है। ग्राम पंचायत अधिकारी जहां पंचायती राज विभाग के कर्मचारी हैं वहीं ग्राम विकास अधिकारी विकास विभाग के कर्मचारी हैं। डीएम के निर्देश पर सचिवों को चिह्नित करने का काम इन दोनों विभागों में शुुरु हो गया है। बताया जाता है कि डीएम की ओर से मनरेगा एक्ट की धारा 25 के तहत सचिव तथा प्रधान से एक हजार का दंड लगाकर वसूली करने का निर्देश है, लिहाजा वसूली का कार्य संबंधित विभाग ही कर सकता है।
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मनरेगा कार्य में लापरवाही बरतने वाले रोजगार सेवक, प्रधान तथा सचिव के खिलाफ कार्रवाई की प्रकिया शुरू की गई है। संबंधित बीडीओ को कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया है। प्रधान, रोजगार सेवक तथा सचिव के बावत बीडीओ से जानकारी भी मांगी गई है।
= यूके पाठक
उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार, मनरेगा, बलिया