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बारिश होते ही मौसमी बीमारियों ने पसारे पांव

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रूक-रूक को हो रही बारिश के कारण मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया है। ऐसे में हाई फीवर बुखार के साथ ही कालरा, मलेरिया, टायफायड, पीलिया आदि रोग से पीड़ित मरीजों की तादात बढ़ती जा रही है। मौसमी बीमारियों को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा ने सुई-दवा की व्यस्वस्था कर लिया है। हालांकि इसका सबसे अच्छा इलाज बचाव है।
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बारिश के दिनों में अक्सर मच्छर का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे संक्रामक रोग फैलने की संभावना प्रबल हो जाती है। इस मौसम में बड़े, बूढ़े, महिला व बच्चें डायरिया, पीलिया, मलेरिया, टायफायड, हाई फीवर, वायरल फीवर के शिकार हो जाते हैं। वर्तमान में हाई फीवर, मलेरिया, टायफायड, उल्टी-दस्त आदि के मरीज आने लगे है। हालाकि अभी जिला अस्पताल में इक्का-दुक्का मरीज आ रहे है। लेकिन अभी इसके बढ़ने की संभावना है। इसको ध्यान में रखते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं मुख्य चिकित्साधिकारी ने जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी व न्यू पीएचसी आदि पर प्रचुर मात्रा में सुई-दवा का इंतजाम कर लिया है। ताकि ऐसे मरीजों का तत्काल इलाज किया जा सकें।
इस बाबत प्रभारी सीएमओ एनएन वर्मा ने बताया कि सीएचसी व पीएचसी पर सुई-दवा भेजने की सूची बना लिया गया है। कल तक सभी जगहों पर दवा पहुंचा दी जाएगी। जबकि सीएमएस डा. एसपी राय का कहना है कि जिला अस्पताल में सूई-दवा उपलब्ध है। अगर कुछ कमी होगी तो उसे मंगा लिया जाएगा।
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मौसमी बीमारी के लक्षण:
- ठंड लगकर व बदन दर्द होकर बुखार होना।
- अचानक हाई फीवर हो जाना।
- बासी भोजन का सेवन करने से उल्टी-दस्त होना।
- मच्छर के काटने से मलेरिया होना।

बचाव के उपाय:
-बदन को ढक कर रखें।
-मच्छरदानी का प्रयोग करें।
-बासी भोजन का सेवन न करें।
-पानी उबालकर सेवन करें।
-मकान व आसपास साफ-सफाई रखें।
-कुलर का पानी तीन-चार दिन पर अवश्य बदलें या उसमें एक ढक्कन केरोसिन तेल डालें।
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