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ददरी मेले को राज्य स्तरीय दर्जा प्रदान करने की उठने लगी आवाज

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दुबहर। भृगु मुनि के शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर लगने वाले ददरी मेला को राज्य स्तरीय मेला दर्जा प्रदान करने की मांग बुद्धिजीवियों द्वारा की जाने लगी है। क्यों कि यह मेला पौराणिक काल से लगता चला आ रहा है। भृगु मुनि के तपोस्थली पर दर्दर मुनि द्वारा आयोजित महायज्ञ में 88 हजार ऋषि-मुनियों का समागम हुआ था। इसलिए राज्य स्तरीय दर्जा दिया जाना नितांत आवश्यक है।
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ब्यासी निवासी विजय कुमार सिंह ने कहा कि इस मेले की पहचान बलिया जनपद की पहचान से जुड़ी हुई है। जहां प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से व्यापारी आकर इस मेले की शोभा बढ़ाते हैं और अपना व्यवसाय करते रहते हैं। ऐसे में इस मेले को राज्य स्तरीय मेले का दर्जा मिलनी चाहिए। दुबहर निवासी नागेंद्र सिंह टप्पू ने कहा कि ददरी मेला को राज्य स्तरीय दर्जा इसलिए भी मिलना चाहिए कि यह मेला लोगों के लिए आस्था का प्रतीक है। इस मेले के शुरुआती दिन कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर जनपद ही नहीं, बल्कि कई जनपदों के लोग मोक्ष की प्राप्ति के लिए गंगा नदी पर रात्रि विश्राम करते हुए स्नान आदि कर बाबा भृगु और दर्दर मुनि का दर्शन करते हैं। नमो नारायण यादव का कहना है कि महर्षि भृगु और दर्दर मुनि की तपस्या से सुगंधित धरती की पहचान को राज्य स्तरीय दर्जा देकर मेले का सर्वांगीण विकास अवश्य होना चाहिए।
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