जिले में पशु तस्करी व पशु क्रूरता आदि पर रोक लगाने के लिए बनी समिति भी कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। महीनों बाद भी यह समिति पूरी तरह गठित नहीं हो सकी है। अधिकारी की मानें तो विभाग की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है जो अभी तक स्वीकृत नहीं हो सका है।
जिले में दशकों से एसपीसीए (सोसायटी फॉर प्रीवेंशन ऑफ क्रूएलिटि टू एनिमल्स) संचालित है। शासन के प्रावधानों के अनुसार जिले में पशुओं की तस्करी व पशु क्रूरता पर नजर रखने के लिए गठित इस समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी व उपाध्यक्ष पुलिस अधीक्षक, सचिव जिला पशु चिकित्साधिकारी नामित होते हैं। जबकि बतौर सदस्य समिति में डीएफओ, पीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता, नगर पालिका व नगर पंचायतों के ईओ आदि भी शामिल होते हैं। इसके अलावा समिति में दो पशु प्रेमी शासन की ओर से नामित होते हैं और एक सदस्य गौशाला की ओर से नामित गौशाला के मंत्री या अध्यक्ष होते हैं। बताया जाता है महीनों बाद भी यह समिति पूरी तरह गठित नहीं है। हालांकि पिछले सालों में भी यह समिति कागजों तक सिमटी रही। एसपीसीए के जिम्मे जिले में आयोजित होने वाले पशु मेला व प्रांतीय सीमाओं पर होने वाले पशु तस्करी पर लगाम लगाने के लिए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन ऐसा कभी भी देखने को नहीं मिलता। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 13 दिनों से बिहार प्रांत की सीमा से सटे भरौली में पशु मेले की मॉनीटरिंग नहीं की गई है। हालांकि तीन दिनों पहले एसपी श्रीपर्णा गांगुली ने देर शाम में भरौली गंगा पुल पर जाकर जायजा लिया था। जिला पशु चिकित्साधिकारी की मानें तो समिति में दो पशु प्रेमी के नामित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और अभी तक सहमति नहीं मिल सकी है।
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25 साल पहले की थी छापेमारी
बलिया। जिला पंचायत की ओर से साल में तीन बार भरौली में पशु मेला का आयोजन किया जाता है। लेकिन एसपीसीए की ओर से मेला के बाबत कभी भी मॉनीटरिंग नहीं नकी जाती है। वर्ष 1991 में एसपीसीए ने पशु मेला के दौरान छापेमारी की थी और मेले से तस्करी को जा रहे तीन दर्जन से अधिक मवेशियों को पकड़कर गौशाला को भेजा गया था। लेकिन इसके बाद सक्रियता नहीं दिखी।
कोट
एसपीसीए की ओर से समय-समय पर बैठक कर संबंधित अधिकारियों को पशु तस्करी व पशु क्रूरता रोकने के निर्देश दिए जाते हैं। नौ दिन पहले भी हुई बैठक में सभी पुलिस अधिकारियों व अन्य विभागों को जिलाधिकारी की ओर से निर्देश गया। दो सदस्यों का प्रस्ताव अभी तक शासन स्तर पर लंबित है।
डा. जीसी द्विवेदी
सीवीओ/सचिव, एसपीसीए,