दुबहर। जहां सतसंग होता है वहां पहुंचने मात्र से व्यक्ति के सारे पाप कट जाते है। सतसंग का लाभ बड़े पुण्य प्रताप के बाद ही मिलता है। उक्त बातें दादा के छपरा स्थित आदिब्रह्म बाबा के मंदिर पर हो रहे श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ के दौरान कथावाचक पंडित गौरव कृष्ण शास्त्री ने मंगलवार को प्रवचन के दौरान कहीं।
कहा कि कथा में वह शक्ति है कि वह व्यक्ति के कई जन्मों के पाप को थोकर संमार्ग और सदगति प्रदान करने में समक्ष है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण, गणिका, गिद्ध, अजामिल और धुंधकारी है। कहाकि भक्ति के मार्ग पर चलने वालों को ही सतसंग की राह मिलती है। भक्ति में वह शक्ति है कि वह पत्थर की मूर्ति में भी भगवान को देख लेती है। कहा कि प्रकृति के प्रत्येक गतिविधि पर परमात्मा की नजर रहती है। परमात्मा चींटी से लेकर हाथी तक के जीव की रक्षा करते है। मनुष्य चाहे जितनी भी चालाकी कर ले। लेकिन वहीं होगा जो परमात्मा ने विधि के विधान में लिख रखा है।
दोपहर के 12 से चार बजे तक आयोजित कथा में नगवा, अखार, सवरुबांध, बंधुचक, बुल्लापुर आदि गांवों के श्रद्धालुओं का जमावाड़ा हो रहा है। इस मौके पर मुख्य कार्यकर्ता गोगा पाठक, प्रधान प्रतिनिधि सुनील सिंह, विमल पाठक, उमाशंकर पाठक, जेपी तिवारी, गंगा पाठक, अख्तर अली, रवींद्र पाठक, रामप्रवेश, प्रभुनारायण, अशोक, भोला, राजा आदि लोग मौजूद रहे।