जरवल (बहराइच)। अटवा गांव के 30 से अधिक श्रमिक मनरेगा में काम के लिए ग्राम विकास अधिकारी के चक्कर लगा रहे हैं। श्रमिकों को काम पर बुलाने के बाद वापस किया जा रहा है। ऐसे में श्रमिक तीन दिनों से चक्कर लगाकर वापस लौटने को विवश हैं। मनरेगा में मजदूरी न मिलने से श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सरकार दूसरे प्रदेशों में रह रहे लोगों को उनके घर वापस ला रही है। सरकार इन कामगारों को गांव में ही मनरेगा में काम देने के लिए योजना बना रही है। लेकिन गांवों में इन श्रमिकों को काम नहीं मिल रहा है। जरवल विकास खंड अंतर्गत ग्राम अटवा के सैकड़ों ग्रामीण दूसरे प्रदेश से आए हैं।
इनको गांव में मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा है। गांव निवासी रामपाल यादव, रमेश, रामतेज, रामगोपाल, बेचनलाल, गोमती प्रसाद, जगदेव, फूलचंद्र, कृपाराम यादव, रामदेव यादव समेत 30 से अधिक ग्रामीणों को ग्राम विकास अधिकारी पवन कुमार ने मनरेगा में काम के लिए बुलाया।
सभी ग्रामीण फावड़ा लेकर काम पर गए, लेकिन बाद में फोन करके काम न होने की बात कहकर वापस कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि तीन दिनों से लगातार उन्हें काम पर बुलाया जाता है, इसके बाद वापस कर दिया जाता है। सभी ने कहा कि काम न मिलने से उनके परिवार में रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
ग्राम विकास अधिकारी पवन कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान के परिवार के किसी सदस्य की शुक्रवार को मौत हो गई थी। इस पर सभी को वापस कर दिया गया है। शनिवार को वह स्वयं सभी को मनरेगा में काम देंगे। वहीं खंड विकास अधिकारी आशाराम वर्मा का कहना है कि मामले की जानकारी हुई है। सभी श्रमिकों को मनरेगा में काम दिया जाएगा।