जंगल में घायल मिली वनदुर्गा इलाज के दौरान सवा दो माह बीतने के बाद चर्चा में आई। उसे अरसे तक जंगल में बंदरों के साथ समय बिताने के लिए चर्चित किया गया। लेकिन जहां पर वनदुर्गा मिली, वह क्षेत्र बाघ की टेरीटरी है। 20 मीटर की दूरी पर बरेली-बस्ती हाईवे भी स्थित है। वनाधिकारी स्वयं हास्यास्पद बयानों से हतप्रभ हैं। अधिकारियों का मानना है कि शाम ढलते ही लोग पैदल जाने में भी वहां संकोच करते हैं।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी बाघ और तेंदुओं के लिए जाना जाता है। यहां बाघों की संख्या करीब 50 है, जबकि 57 से अधिक तेंदुए हैं। एक बाघ की टेरीटरी 15 किलोमीटर मानी जाती है। कतर्नियाघाट का मोतीपुर रेंज का नैनिहा क्षेत्र भी बाघ की टेरीटरी में आता है। 24 घंटे में एक बार बाघ या तेंदुआ क्षेत्र में अवश्य दिखाई पड़ता है। उसी क्षेत्र में बस्ती-बरेली हाईवे से सटे खपरा वन चौकी के पास सवा दो माह पूर्व मिली वन दुर्गा को मोगली गर्ल बताकर हो हल्ला मचाया गया।
इस मामले में मोतीपुर के वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद आलम से जब बात की गई तो पहले तो वह हंस पड़े। फिर बोले कि बाघ की टेरीटरी में हिरन और ग्रामीण नहीं बचते हैं। आए दिन हमला होता है। ऐसे में एक किशोरी वर्षों तक रही, वह जिंदा कैसे बच गई। उन्होंने कहा कि खपरा वन चौकी पर वन दरोगा की अगुवाई में वाचर मोहम्मद आरिफ, मुल्ली, प्रमोद कुमार, वन रक्षक रामकृपाल की ड्यूटी थी।
रामकृपाल 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो गए। 24 घंटे इन वनकर्मियों की जंगल पर नजर रहती है। कोई पगडंडी ऐसी नहीं है, जिस पर वे गश्त न करते हों। इसके अलावा हाईवे होने के चलते दिल्ली से आसाम तक के वाहन निकलते हैं। अधिकांश वाहन उत्तराखंड, बरेली, दिल्ली, पंजाब के लिए आते-जाते हैं। ऐसे में हो सकता है कि किसी ने वाहन से ही किशोरी को फेंका होगा। रेंजर का कहना है कि मोगली गर्ल की कहानी अविश्वसनीय है। जो इसे साबित करने की बात कहते हैं, उन्होंने बालिका के बरामद होने पर घटनास्थल पर बंदरों के साथ बालिका की फोटोग्राफी क्यों नहीं की।
जो व्यक्ति जंगल में रहता है, उसे भोजन अच्छा नहीं लगता है। जबकि वनदुर्गा जिला अस्पताल पहुंचने के दिन से ही दाल-रोटी, सब्जी, ब्रेड और दूध का सेवन कर रही थी। इसकी पुष्टि वनदुर्गा का इलाज करने वाले वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा कर रहे हैं। सीएमएस डॉ. डीके सिंह भी मानते हैं कि भर्ती होने के समय वह बदहवास हालत में थी। लेकिन हालत सुधरने पर समुचित तरीके से भोजन किया, जिससे उसकी सेहत में तेजी से सुधार हुआ।
जिला अस्पताल से लखनऊ पुनर्वास केंद्र रेफर की गई वनदुर्गा की जांच जिला अस्पताल में हुई थी। उसके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा सात प्रतिशत है। किसी तरह का इंफेक्शन नहीं मिला। इसकी पुष्टि भी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने की है।