बाढ़ आने से पहले ही लोगों को इसके संकेत मिल जाएंगे ताकि वे सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर सकें। इसके लिए बैराज पर हाई फ्रीक्वेंसी का सायरन लगाया गया है। बैराज पर पानी के खतरे के निशान के ऊपर पहुंचते ही सायरन बज उठेगा। इसकी आवाज 16 किलोमीटर परिक्षेत्र में सुनाई देगी। इस परिक्षेत्र के 34 गांवों के ग्रामीण सजग हो सकेंगे और गांवों को समय रहते खाली कराया जा सकेगा।
नानपारा तहसील क्षेत्र सिर्फ सरयू ही नहीं बल्कि घाघरा और राप्ती का भी कहर झेलता है। वर्ष 2014 में 15 अगस्त को नेपाल से पानी आने पर गोपिया बैराज का तटबंध टूट गया था। इसके पानी में छह गांव बह गए थे, जबकि 147 गांव प्रभावित हुए थे। डूबने से 19 लोगों की मौत हो गई थी। बड़े पैमाने पर तबाही मची थी। दो माह तक बचाव और राहत कार्य चला था, जिसमें 19.63 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
ये तबाही इसलिए मची थी क्योंकि समय रहते ग्रामीण जागरूक नहीं हो सके थे। इस समस्या के निदान के लिए सरयू नहर खंड के अधिकारियों ने गोपिया बैराज परिक्षेत्र के ग्रामीणों को सजग करने की कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत मुंबई से हाई फ्रीक्वेंसी का सायरन मंगवाया गया है।
सरयू नहर खंड के अधिशासी अभियंता देवेश कुमार शुक्ला ने बताया कि दो लाख रुपये में सायरन खरीदा गया है। इसे बैराज के ऊपर लगवाया गया है। ऐसी सर्किट तैयार की गई है, जिससे बैराज के खतरे के निशान 133.50 मीटर से जलस्तर ऊपर होने पर सायरन अपने आप बज उठेगा। अधिशासी अभियंता ने बताया कि सायरन की फ्रीक्वेंसी इतनी तेज है कि 16 किलोमीटर परिक्षेत्र में इसकी आवाज सुनाई पड़ेगी, जिससे परिक्षेत्र के 34 गांवों के लोग समय से अलर्ट हो सकेंगे। आसानी से गांव खाली हो जाएंगे, जिससे जनहानि नहीं होगी। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को भी सायरन स्थापित करने के मामले में सजग कर दिया गया है।