घाघरा नदी का जलस्तर रात से अचानक बढ़ रहा है। लगभग तीन फीट पानी अब तक नदी में बढ़ा है। इसके साथ ही नदी में कटान शुरू हो गई है। बीती रात से गुरुवार दोपहर तक लगभग 80 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा गई है। वहीं, कायमपुर प्राथमिक विद्यालय की जमीन के साथ ही ग्रामीणों के खेतों में नदी तेज कटान कर रही है। सूचना तहसील को दी गई है, लेकिन कोई भी राजस्वकर्मी अब तक मौके पर नहीं पहुंचा है। अगर जलस्तर में बढ़ोतरी की यही स्थिति रही तो बाढ़ कब दस्तक दे दे, कुछ भी कहा नहीं जा सकता।
दो दिन से नेपाल में पहाड़ों पर निरंतर हो रही वर्षा के चलते अब घाघरा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। बुधवार की रात आठ बजे से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी ने बताया कि रात से नदी का पानी दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। जिसके चलते गुरुवार दोपहर में एल्ग्रिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 103.036 मीटर मापा गया।
वहीं, महसी तहसील के इलाकों में नदी का पानी जमीन की सतह से सटकर बह रहा है। इसके साथ ही कटान तेज हो गई है। चुरईपुरवा, मंगलपुरवा, जोलाहनपुरवा, कायमपुर, पचदेवरी और मैकूपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गए हैं।
कायमपुर व चुरईपुरवा गांव के निकट नदी की कटान काफी तेज है। यहां पर बीते वर्ष कटान से प्राथमिक विद्यालय भवन को ढहाकर सामग्री विभाग ने अपने कब्जे में कर ली थी। लेकिन रात से शुरू हुई कटान के चलते प्राथमिक स्कूल के परिसर में नदी तेज कटान कर रही है।
इसके साथ ही कायमपुर निवासी रामनरेश, नंगू, सूर्यभान, जगत, राजकुमार, हरिनरायन व चुरईपुरवा निवासी उमाशंकर, नन्हें, किशोरी लाल, भगवानदीन, संतलाल, छबीले समेत 16 से अधिक ग्रामीणों की खेती योग्य जमीन को नदी की लहरें लील रही हैं। ग्रामीण बेबस हैं। सूचना तहसील को दी गई है। लेकिन अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं हुए हैं।
कायमपुर, चुरईपुरवा और मंगलपुरवा के साथ ही पचदेवरी गांव से नदी और गांव के बीच महज 10 से 20 मीटर का फासला है। इससे गांव के लोग दहशत में हैं। अगर जलस्तर में और इजाफा हुआ तो ग्रामीणों के मकान कटान की जद में आ जाएंगे। फिर तबाही का मंजर अलग ही नजर आएगा।
कायमपुर निवासी रामनरेश और सूर्यभान ने कहा कि रात से नदी तेज कटान कर रही है। खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हो रही है। सूचना के बावजूद अब तक लेखपाल व अन्य राजस्वकर्मी दिखाई नहीं पड़े हैं। ऐसे में जिला व तहसील प्रशासन बाढ़ से बचा पाएगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
नदी के रुख को देखकर मुहाने पर स्थित गांव के ग्रामीण अपने आशियाने को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए स्थान तलाशने लगे हैं। कुछ ने रिश्तेदारियों में बात की है तो कुछ तटबंध की ओर पलायन करने की तैयारी में हैं। उमाशंकर, किशोरीलाल और संतलाल का कहना है कि रात से अब तक नदी का रुख काफी विकराल हो चुका है। लेकिन मदद नहीं मिल सकी है। ऐसे में प्रशासन के भरोसे रहे तो परिवार की जिंदगी खतरे में पड़ेगी।
नदी में बढ़ रहे जलस्तर के मद्देनजर जब उपजिलाधिकारी नागेंद्र कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जलस्तर बढ़ने की सूचना मिली है। राजस्वकर्मियों को अलर्ट किया गया है। वहीं, तहसीलदार राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों के ग्राम प्रधानों को नाव दुरुस्त रखने और नाविकों को 24 घंटे तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।