तराई में पड़ रही कड़ाके की ठंड गरीबों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। शनिवार की रात ठंड लगने से दो महिलाओं की मौत हो गई। इनमें से एक महिला दो दिन से भूखी थी। घर में राशन न होने से उसने खाना भी नहीं खाया था। परिवारीजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया है। मामले की सूचना तहसील को दी गई, लेकिन कोई भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।
महसी तहसील अंतर्गत विकास खंड शिवपुर के गड़रियनपुरवा भगवानपुर बेलासपुर निवासी रामकुमार का परिवार टिनशेड में गुजर-बसर करता है। मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण होता है। परिवार भूमिहीन है।
रामकुमार का कहना है कि कोटे से लाया गया अनाज दो दिन पूर्व खत्म हो गया था। घर में राशन न होने से खाना नहीं बन सका। उसकी पत्नी मनीषा दो दिन से भूखी थी। कड़ाके की ठंड के बीच शनिवार रात करीब 10 बजे उसकी हालत बिगड़ गई। तेज पेट दर्द व कंपकंपी होने लगी।
अलाव जलाकर मनीषा को राहत देने की कोशिश की गई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी की जा रही थी, तभी मनीषा ने दम तोड़ दिया। इस मामले में तहसील को सूचना देने के बाद सुबह ग्राम प्रधान निशा खातून ने अंतिम संस्कार का इंतजाम करवाया।
पीड़ित रामकुमार ने बताया कि उसका पात्र गृहस्थी का राशनकार्ड बना हुआ है। दो यूनिट के राशनकार्ड पर सिर्फ 10 किलो राशन मिलता है। ऐसे में 15-20 दिन में ही राशन खत्म हो जाता है। फिर मेहनत मजदूरी के द्वारा ही दो जून की रोटी का जुगाड़ होता है।
उधर, मोतीपुर तहसील अंतर्गत सुजौली थाना क्षेत्र के भवानीपुर गांव निवासी रेखा (35) पत्नी जगदीश कुछ दिनों से बीमार थी। शनिवार रात करीब 11 बजे रेखा को कंपकंपी, पेट दर्द और सीने में दर्द होने लगा। बच्चों की सूचना पर पहुंचे पड़ोसियों ने उसे तिकुनिया स्थित स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की तैयारी की, लेकिन इसी बीच रेखा ने दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों के सहयोग से उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। रेखा की ठंड से मौत के बाद उसके बच्चे अनाथ हो गए हैं। घर में पुत्री गुड़िया, पुत्र पवन और सुजीत हैं। रेखा के पति की आठ साल पूर्व मौत हो चुकी थी। वह प्राथमिक विद्यालय में रसोइया के पद पर काम कर भरण पोषण कर रही थी।
मनीषा की मौत के बाद ग्राम प्रधान निशा खातून के प्रतिनिधि बाबू खां सुबह गांव पहुंचे। उन्होंने रामकुमार के घर पर राशन का इंतजाम करवाया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने स्वीकार किया कि राशन खत्म हो गया था। रामकुमार को मजदूरी नहीं मिल सकी थी, जिससे खाने का इंतजाम नहीं हो सका। पहले रामकुमार ने बताया भी नहीं। इस कारण घर में खाना नहीं बना।
अपर जिलाधिकारी विद्याशंकर सिंह ने कहा कि महिला के परिवार का राशनकार्ड बना हुआ है। फिर भी परिवार के लोग भूख से मौत की बात कह रहे हैं तो जांच कराई जाएगी। ठंड से मौत के मामले में पोस्टमार्टम अनिवार्य होता है। बिना पोस्टमार्टम के मृतक आश्रितों को सहायता नहीं मिल सकती और न ही ठंड से मौत की पुष्टि हो सकती है। फिर भी मामले की जांच कराएंगे।