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Bahraich News: बाढ़ की जद में दो सौ गांव, बचाने की कवायद शुरू

Wed, 25 Jun 2025 12:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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बहराइच। प्रतिवर्ष सरयू में आने वाली बाढ़ के कारण दो सौ से अधिक गांव प्रभावित होते है। बाढ़ का प्रभाव सबसे ज्यादा महसी, मिहींपुरवा, नानपारा व कैसरगंज क्षेत्र में होता है। बाढ़ से बचाव के लिए जिले में नई कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके साथ बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत चौकियों में मिलने वाले भोजन का रोस्टर भी जारी किया गया है। इसमें पहली बार बुजुर्ग व बच्चों के लिए एक गिलास दूध भी शामिल किया गया है।
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जिले के कृषि का आधार कही जाने वाली सरयू नदी बरसात के तीन महीनों में लोगों के जीवन का काल बन जाती है। यहां आने वाली बाढ़ से प्रतिवर्ष एक से दो गांव जिले के नक्शे से गायब हो जाते हैं। अभी हाल ही में महसी के जानकीनगर में लोग अपने घरों को तोड़ते देखे गए। यह लोग दो दिन की बारिश में नदी का रुख देखकर भयभीत थे। इस वर्ष लोगों को बाढ़ से कम नुकसान हो इसलिए पहले से ही बाढ़ बचाव के उपाय शुरू हो गए हैं। घाघरा की कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग महसी ब्लॉक क्षेत्र के पचदेवरी गांव में कटानरोधी कार्य कर रहा है। यहां तीन करोड़ रुपये से पॉर्क्यूपाइन व जियो बैग लगाए जा रहे हैं।
टिकुरी गांव को बचाने के लिए चार करोड़ की लागत से पॉर्क्यूपाइन व जियो बैग लग रहे हैं। इसके अलावा 12 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। तीन स्थायी व तीन अस्थायी बाढ़ शरणालय व आठ लंगर स्थल बनाने का भी प्रस्ताव है। 147 नाविकों के साथ नाव की तलाश की जा रही है। गोताखोरों की भी सूची तैयार हो रही है ताकि जरूरत पर उनसे संपर्क किया जा सके। पशुओं को चारा मिले, इसकी भी तैयारी की गई है। भूसा खरीद का टेंडर पहले ही कराया जा रहा है। इसके साथ ही शिवपुर विकास खंड के ग्राम पंचायत वही महसी के तिकुरी, कोरहवा, किसानगंज, मुरौव्वा, पिपरा और गोलागंज नई बस्ती जैसे 11 गांवों की 3000 आबादी और सैकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि को कटान से बचाने के लिए पॉर्क्यूपाइन लगाया जा रहा है।
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बाढ़ शरणालयों में लॉजिस्टिक की व्यवस्था के साथ राहत कैंप में प्रतिदिन तीन बार भोजन की व्यवस्था होगी। इसमें सुबह नाश्ते में दलिया, उबला चना या पोहा, एक मौसमी फल, 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धजनों को एक गिलास दूध व अन्य को चाय मिलेगी। दोपहर के भोजन में मौसम की सब्जी, दाल, चावल, रोटी,पूड़ी तथा रात्रि के भोजन में मौसम की सब्जी, रोटी,पूड़ी व मिठाई परोसने के लिए शासन ने कहा है।
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- गौरव रंजन श्रीवास्तव, एडीएम
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