तराई में डेंगू और बुखार से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। जिला अस्पताल में भर्ती मासूम समेत दो रोगियों की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। इनमें महिला डेंगू की चपेट में थी। मासूम दिमागी बुखार से पीड़ित था। वहीं डेंगू के और पांच रोगी भर्ती कराए गए हैं। इनमें दो रोगियों की हालत नाजुक बताई जा रही है।
खैरीघाट क्षेत्र में मांझा दरिया गांव निवासी ऊषा देवी (25) पत्नी रामू को पांच दिन बुखार की शिकायत हुई थी। उसे तेज बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते निकल रहे थे। उल्टी की भी शिकायत थी। तीन दिन पूर्व परिवारीजनों ने ऊषा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने डेंगू की पुष्टि करते हुए इलाज शुरू किया।
सोमवार सुबह ऊषा की सांस थम गई। वहीं दिमागी बुखार से पीड़ित रामगांव निवासी अनीस (6) पुत्र जमील की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। उसे बुखार के साथ तेज झटके आ रहे थे। डेंगू से पीड़ित और पांच रोगी जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।
इनमें शीतल गांव निवासी नुक्ता मणि (45), बड़गांवा निवासी मोहम्मद हुजैफा (12), हरदी के पूरे बस्ती निवासी रामभजन पाठक (46), बालापुर निवासी तरुण कुमार (42) व दरगाह निवासी मोहम्मद कासिम (35) शामिल हैं। इन रोगियों में रामभजन और उजैफा की हालत नाजुक बताई जा रही है।
सीमावर्ती नवाबगंज क्षेत्र में भी डेंगू का प्रकोप है। 15 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। इनमें नौ की हालत गंभीर होने के चलते उन्हें क्षेत्रीय चिकित्सकों ने लखनऊ रेफर कर दिया है। नवाबगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बुखार पीड़ितों की भीड़ लग रही है।
दो दिन में परीक्षण के दौरान नवाबगंज निवासी कमरजहां (35), नीलू (15), भोला (50), वंदना (40), सनी (40), अख्तर (50), संतोष (22), कैलाशा देवी (39), शरीफ (40), नसीम (35), रेशमा (20), मकसूद (25), गुड्डू (30), सकीना (50), रामेश्वर (20), बिंसी (10), बबलू कुरैशी (25) समेत 15 लोग डेंगू पीड़ित मिले हैं। सभी को जिला अस्पताल जाने की सलाह दी गई। इनमें से नौ रोगी डेंगू की पुष्टि होने के बाद लखनऊ चले गए हैं।