मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहराइच को दो मंत्रियों की सौगात दी है। इसे आसन्न 2017 के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री का यह दांव मुस्लिमों और दलितों को रिझाने के लिए है।
बहराइच को दो मंत्री देकर सभी विधानसभा सीटों पर सपा का परचम लहराने की भी कोशिश है। साथ ही दोनों मंत्रियों के कामकाज और व्यवहार का तरीका भी सपा के मिशन 2017 की तस्वीर तय करेगा। जिले में सदर विधायक डॉ. वकार अहमद शाह श्रम एवं सेवायोजन मंत्री के रूप में प्रदेश सरकार में अपनी पैठ बनाए हुए थे। लेकिन उनके बीमार होने के बाद जिले से लालबत्ती छिन गई थी।
हालांकि कुछ दिनों बाद ही सपा नेतृत्व ने उनके बेटे मटेरा विधायक यासर शाह को राज्यमंत्री बनाकर बहराइच को तोहफा दिया। लेकिन बीते कुछ दिनों से सपा सरकार की नीतियों को लेकर उंगलियां उठ रहीं थीं। चुनाव भी नजदीक है। ऐसे में शायद मुख्यमंत्री ने नया दांव चलते हुए अपने मंत्रिमंडल में यासर शाह को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की कुर्सी सौंप दी है।
बहराइच जिला अल्पसंख्यक बाहुल्य माना जाता है। ऐसे में राज्यमंत्री यासर शाह का प्रमोशन इस नजरिए से भी देखा जा रहा है कि शायद मुख्यमंत्री ने यह कदम अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों को खुश करने के लिए उठाया है। वहीं दलित वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बलहा के दलित विधायक बंशीधर बौद्ध को राज्यमंत्री की कुर्सी सौंपी है।
मुख्यमंत्री का यह दांवपेंच देखकर राजनीतिक पंडित सकते में हैं। अब अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों और दलितों को रिझाने के लिए बसपा और भाजपा कौन सी चाल चलते हैं। इसके लिए इंतजार करना होगा। फिलहाल जिले को दो मंत्री की सौगात मिलने के बाद विकास की उम्मीद जरूर बंधी है।
हासिल हुई थी सिर्फ दो सीटें
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को सिर्फ दो सीटें हासिल हुई थीं। इनमें सदर विधानसभा क्षेत्र से डॉ. वकार अहमद शाह और मटेरा विधानसभा क्षेत्र से यासर शाह चुनाव जीते थे। जबकि नानपारा और पयागपुर में कांग्रेस ने कब्जा जमाया था। वहीं बलहा, कैसरगंज में भाजपा का परचम लहराया था। महसी में बसपा उम्मीदवार की जीत हुई थी। हालांकि बलहा के उपचुनाव में सपा ने भाजपा से सीट छीन ली थी।