जिला अस्पताल में फर्श पर लेटे मरीज
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तराई में मौसम परिवर्तन के बीच संक्रामक रोगों का कहर शुरू हो गया है। बुखार, डायरिया, पीलिया और अन्य संक्रामक तथा जलजनित रोग लोगों को बीमार बना रहे हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। अन्य दिनों की अपेक्षा दोगुने रोगी अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके चलते यहां संसाधन भी कम पड़ने लगे हैं। अस्पताल की फर्श और सीमेंट के चबूतरों पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यही हाल बाल रोग विभाग का है। जहां अभिभावकों की गोद में बच्चों को ड्रिप चढ़ाई जा रही है। एक बेड पर दो से तीन बाल रोगी भर्ती हैं।
तराई का मौसम पल-पल बदल रहा है। इससे तेज बुखार, डायरिया, पीलिया और अन्य जल जनित तथा संक्रामक रोग फैल रहे हैं। सामान्य दिनों में जिला अस्पताल में ओपीडी में अधिकतम 80 से 100 मरीज पहुंचते थे। वहीं यह संख्या अब 200 से 240 तक पहुंच गई है।
यही हाल बाल रोग विभाग का है। जहां एक दिन में 350 से 500 बाल रोगी पहुंच रहे हैं। इनमें 10 फीसदी मरीज भर्ती करने लायक होते हैं। इनमेें बुखार और डायरिया के रोगियों की संख्या अधिक है। हालात यह हैं कि बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से अस्पताल के संसाधन कम पड़ने लगे हैं। 201 बेड के जिला अस्पताल के आर्थोपैडिक व सामान्य वार्ड में फर्श पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
वार्ड के अंदर बने चबूतरे को बेड बना दिया गया है। यही हाल बाल रोग विभाग का है। यहां बच्चों को भर्ती करने के लिए 80 बेड हैं। लेकिन बाल रोगियों की संख्या बढ़ने के कारण एक बेड पर दो से तीन बाल रोगी भर्ती हो रहे हैं। जिनको बेड नहीं मिल रहा, वह बच्चे माता-पिता की गोद में इलाज करा रहे हैं। उधर, जिला अस्पताल में बच्चों के सिरप के अलावा बुखार, खांसी और अन्य रोगों की दवाइयां भी इस समय कम हैं। जिससे मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. डीके सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल में बेडों की संख्या बढ़ाने और अन्य संसाधनों को दुरुस्त करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। अभी मरीजों की संख्या मामूली बढ़ी है। व्यवस्थाएं और बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।