आंधी के दौरान कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में भी तमाम पेड़ गिर गए। 35 किलोमीटर की दूरी तक जगह-जगह सागौन और साखू के पेड़ सड़क पर पड़े हैं, जिन्हें अभी तक हटाया नहीं जा सका है। जिसके चलते कतर्नियाघाट सेंक्चुरी का आवागमन ठप है। 14 बसों का संचालन भी प्रभावित है। आम आदमी के साथ पर्यटक भी कतर्नियाघाट नहीं पहुंच पा रहे।
जिले में बुधवार को तूफान के चलते बड़े पैमाने पर तबाही मची। इस दौरान कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में मिहींपुरवा-कतर्नियाघाट मार्ग पर जगह-जगह पेड़ गिर गए। कतर्नियाघाट से मुर्तिहा तक 35 किलोमीटर परिक्षेत्र में आधे से एक किलोमीटर के अंतराल में पेड़ गिरे पड़े हैं। लेकिन उन्हें हटाने का कार्य अब तक नहीं शुरू हुआ है।
जिसके चलते 48 घंटे से इस मार्ग पर बिछिया से मिहींपुरवा और बहराइच के मध्य संचालित होने वाली 14 बसों का आवागमन ठप है। स्थानीय नागरिकों को भी दुश्वारियां हो रही हैं। सबसे अधिक दिक्कत कतर्नियाघाट सेंक्चुरी जाने वाले पर्यटकों को उठानी पड़ रही है। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के अधिकारियों की ओर से अब तक पेड़ों को हटाने का कार्य शुरू नहीं किया गया है।
उधर, कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मुर्तिहा रेंज में लक्कड़ शाह बाबा का अस्ताना स्थित है। इस आस्ताने पर 26 मई को वार्षिक मेला लगेगा। इस मेले में जायरीन की आमद शुरू हो गई है। लेकिन मार्ग पर पेड़ गिरे होने से जायरीन को नेपाल के रास्ते चक्कर लगाना पड़ रहा है। 35 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है।