बहराइच। जैव विविधताओं व प्रकृति की मनोरम छटाओं से भरा कतनिर्याघाट वन्यजीव प्रभाग देशी के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी लुभा रहा है। कतनिर्याघाट में मौजूद बाघ, तेंंदुआ, हाथी, गैंडा, पाढ़ा, चीतल आदि की एक झलक पाने के लिए भारी मात्रा में पर्यटक उमड़ रहे हैं। पर्यटकों के आमद से जहां सरकार को राजस्व मिल रहा है तो वहीं स्थानीय लोगों का भी रोजगार सृजन हो रहा है। पर्यटकों में कतनिर्याघाट की चाहत इतनी है, कि एक माह में छह विदेशी पर्यटकों समेत 2200 से अधिक पर्यटक कतनिर्याघाट का दीदार कर चुके हैं।
मिहींपुरवा तहसील स्थित कतनिर्याघाट वन्यजीव प्रभाग 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। कतनिर्याघाट एक ओर जहां नेपाल के जंगल तो वहीं दूसरी तरह लखीमपुर के दुधवा से सटा हुआ है। इससे यहां जैव विविधताओं की भरमार है और दुधवा व नेपाल के वन्यजीव भी यहां दस्तक देते हैं। यही कारण है, कि कतनिर्याघाट वन्यजीव प्रभाग को इस बार पर्यटकों के लिए नौ दिन पहले छह नवंबर को ही पर्यटकों के लिख खोल दिया गया था। पूर्व में कतनिर्याघाट 15 नवंबर को पर्यटकों के लिए खुलता है। नौ दिन पहले पर्यटन स्थल खोलने का फायदा भी हो रहा है और भारी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। लगभग एक माह में कतनिर्याघाट 2200 से अधिक पर्यटक पहुंचे हैं। इसमें छह फ्रांस के विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। यही नहीं 200 से अधिक पर्यटकों ने सरकारी गेस्ट हाउस व हट बुक करवाया है और रुक कर कतनिर्या का लुत्फ उठाया है।
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मगरमच्छ, घड़ियाल, डॉल्पफन के साथ-साथ भा रही बोटिंग
कतनिर्याघाट वन्यजीव प्रभाग से गेरुवा व कौड़ियाला नदियां गुजरी हैं। जिनमें विविध प्रजाति के जलील जीवों के साथ-साथ मगरमच्छ, घड़ियाल व डॉल्पफन भी मौजूद हैं। जिसके चलते कतनिर्या पहुंचने वाले पर्यटक बोटिंग के साथ-साथ इनका दीदार कर रहे हैं। कतनिर्याघाट में विदेशी साइबेरियन पक्षियों की भी आमद शुरू हो गई है।
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पर्यटकों को रोमांचित कर रहे बाघ, तेंदुए व हाथी
कतनिर्याघाट में बाघों की संख्या सबसे ज्यादा हैं। यहां 59 बाघ, 150 से अधिक तेंदुए व 150 हाथी मौजूद हैं। यही नहीं आठ गैंडे, 7000 से अधिक चीतल, हिरण व पांडा हैं। जो कतनिर्याघाट की सैर पर पहुंचने वाले पर्यटकों को लुभा रहे हैं। फ्रांस से आए दल ने बाघिन की फोटो खींच कर उसे एक्स समेत अन्य स्थानों पर साझा भी किया था।
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कतनिर्याघाट वन्यजीव प्रभाग में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। पर्यटकों के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं और पर्यटकों को वन्यजीवों के दीदार भी हो रहे हैं। इस साल पर्यटन बढ़ने की उम्मीद है।
बी. शिवशंकर, डीएफओ