बहराइच। जिला अस्पताल बहराइच को मेडिकल कॉलेज का दर्जा दे दिया गया है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद थी। मगर देखते ही देखते एक साल बीत गया, अभी तक यहां पर हृदय रोग के एक चिकित्सक की ही तैनाती है। ईसीजी की व्यवस्था है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में टीएमटी और ईको जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं। वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को आज भी सिलेंडर से ऑक्सीजन दी जा रही है। हृदय रोग विभाग में टीएमटी और ईको आदि की सुविधा नहीं होने से मरीजों का सही तरीके से इलाज नहीं हो पा रहा है।
बहराइच के जिला अस्पताल में जिले के अलावा श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर के साथ ही नेपाल के मरीजों का भी बोझ रहता है। जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिले हुए लगभग एक साल बीत चुका है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किये गये जिला अस्पताल में हृदय रोगियों के लिए 10 बेड का आईसीयू स्थापित है। यहां एक हृदय रोग विषेशज्ञ डॉ. मलय श्रीवास्तव की तैनाती है। इसके अलावा ईसीजी टेक्नीशियन राजू श्रीवास्तव के साथ ही अन्य कर्मचारियों की तैनाती है।
मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बाद हृदय रोग विभाग में संसाधनों के बढ़ने की उम्मीद जगी थी। यहां पर दो चिकित्सक के पद सृजित हैं। संभावना थी कि प्रोफेसर भी मिलेंगे, लेकिन प्रोफेसर की बात छोड़िए, यहां चिकित्सक ही पूरे नहीं किए जा सके। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मलय श्रीवास्तव का कहना है कि प्रति दिन औसतन 40 से 50 मरीज जांच के लिए पहुंचते है। हृदय रोग विभाग में मरीजों की जांच के लिए महज ईसीजी की सुविधा ही उपलब्ध है। टीएमटी और ईको जैसी अत्याधुनिक जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ईसीजी मशीन से ही परीक्षण कर मरीजों का इलाज किया जाता है। हृदय रोग विभाग में टीएमटी और ईको आदि की सुविधा नहीं होने से मरीजों का सही तरीके से इलाज नहीं हो पा रहा है।
चार बेड पर ही है सेंट्रलाइज मॉनिटरिंग
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मलय श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में 10 बेड का आईसीयू बना हुआ है। आईसीयू में सिर्फ चार बेड पर ही सेंट्रलाइज मॉनिटरिंग लगी है, जिसके माध्यम से मरीज के पल-पल होने वाले परिवर्तन पर नजर रखी जा सकती है। इसके अलावा ऑक्सीजन पाइप बिछी हुई है, मगर ऑक्सीजन सिलेंडर से ही मरीजों को दी जाती है। पाइप लाइन शुरू नहीं हो सकी है।
इन मशीनों की है जरूरत
हृदय रोग के मरीजों की जांच के लिए हार्टवेब ईसीजी मशीन की जरूरत है। यह रोगियों के हृदय की धड़कन की जांच में अहम होती है। इसके अलावा ईको कॉर्डियोग्रॉफी मशीन और टीएमटी मशीन की भी आवश्यकता है। इन मशीनों के न होने के कारण मरीजों को लखनऊ का चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता है।
शासन को भेजी गयी है मांग
हृदय रोग विभाग में मशीनों की स्थापना के लिए शासन से मांग की गयी है। पत्र भेजा जा चुका है। स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से मशीनों को उपलब्ध कराये जाते ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास शुरू हो जाएगा। कम संसाधनों के बाद भी मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।
- डॉ. डीके सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक