बहराइच : रघुनाथपुर गांव में बाघिन की दस्तक के बाद कांबिंग करते पुलिस व वन विभाग की टीम।
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बहराइच। चकिया रेंज से एक बाघिन रविवार सुबह रघुनाथपुर गांव पहुंच गई। वन विभाग के मुताबिक हुसैनपुरवा, सखौली होते हुए बाघिन रघुनाथपुरवा पहुंची है। वह सागौन के जंगल में दहाड़ रही है। उसे जंगल की ओर खदेड़ने के लिए पुलिस और वन विभाग की टीम लगी हुई है। इसके साथ ही सखौली गांव में लगे पिंजड़े को अब रघुनाथपुर में लगाया गया है।
बहराइच वन प्रभाग का चकिया रेंज कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटा है। ऐसे में संरक्षित वन क्षेत्र के बाघ और तेंदुए चकिया रेंज में आ जाते हैं। चकिया रेंज के हुसैनपुरवा गांव में चार दिन पूर्व एक बाघिन दिखी। सूचना पर वन दरोगा रामबिहारी शुक्ल की अगुवाई में टीम ने बाघिन को जंगल में खदेड़ा मगर वह नानपारा रेंज के सखौली जंगल में चली गई। ग्रामीणों के मुताबिक वहां के जंगल में एक सप्ताह तक बाघिन रही। इसके बाद रविवार सुबह बाघिन रघुनाथपुरवा गांव पहुंच गई।
गांव निवासी पंकज आर्य के खेत में मौजूद बाघिन की दहाड़ सुनकर ग्रामीणों ने रेंज कार्यालय पर सूचना दी। इस पर वन क्षेत्राधिकारी राशिद जमाल, वन दरोगा रामबिहारी शुक्ल और मटेरा इंस्पेक्टर चौथीराम यादव पुलिस बल के साथ पहुंच गए। पुलिस और वन विभाग की टीम ग्रामीणों को हटाकर बाघिन को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश कर रही है। वन क्षेत्राधिकारी राशिद जमाल ने बताया कि वनकर्मियों के साथ वह निरंतर गश्त कर रहे हैं। मगर अभी तक बाघिन का पता नहीं चला है। उसे पकड़ने के लिए पिंजड़ा भी लगाया गया है। रेंजर ने बताया कि पगचिह्नों से बाघिन की पहचान हो रही है।
बहराइच वन प्रभाग के कैसरगंज रेंज और नानपारा रेंज में बाघ और तेंदुओं की अधिकता नहीं है। मगर कतर्निया के जंगल से चकिया रेंज होते हुए ये जंगली जीव आ जाते हैं। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि एक वर्ष पूर्व पाठकपुरवा में तेंदुए को पकड़ा गया था। जबकि रुपईडीहा रेंज के निकट एक तेंदुए को लगभग तीन वर्ष पूर्व पकड़ा गया था।