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Bahraich News: गोरखपुर चिड़ियाघर के लिए बाघ से प्राकृतिक वास छीन लिया

Wed, 21 Jan 2026 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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बहराइच वन प्रभाग द्वारा पकड़े गए बाघ की फाइल फोटो।
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बहराइच। गोरखपुर चिड़ियाघर में एक वर्ष से नर बाघ की मांग की जा रही थी। इसी मांग को पूरा करने के लिए बहराइच में जैसे ही नर बाघ मिलने की पुष्टि हुई, उसे प्राकृतिक जंगल से अलग कर गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया। आरोप है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के मानकों के विपरीत बाघ के आबादी में मिलने को ही उसके स्थानांतरण का आधार बना लिया गया।
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गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान प्रशासन लंबे समय से नर बाघ की उपलब्धता के लिए वन विभाग से पत्राचार कर रहा था। हाल में कहीं से भी नर बाघ की पूर्ति संभव नहीं लग रही थी। इसी बीच बहराइच में नर बाघ के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही इसे अवसर के रूप में लिया गया और तेजी से कार्यवाही की गई। इस प्रक्रिया में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बाघ को वास्तव में किसी आपात या खतरे की स्थिति में पकड़ा गया या फिर चिड़ियाघर की मांग को प्राथमिकता दी गई।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लखनऊ निवासी कौशलेंद्र सिंह उत्तराखंड वाइल्ड लाइफ बाेर्ड के सदस्य रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी जंगली जानवर, खासकर बाघ जैसे दुर्लभ जीव को उसके प्राकृतिक आवास से हटाना बेहद संवेदनशील निर्णय होता है। केवल चिड़ियाघर की जरूरत के आधार पर जंगल से बाघ को हटाना संरक्षण की मूल भावना के खिलाफ माना जाता है।
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बाघ का जंगल से हटना न सिर्फ उसके प्राकृतिक जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर डालता है। उन्होंने कहा कि बाघ को शुगर केन टाइगर बताया जा रहा है, ऐसी सोच हास्यास्पद है। कतर्नियाघाट और दुधवा के जंगलों में जगह की कमी नहीं है।


इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की नीति और प्राथमिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि चिड़ियाघरों की मांग इसी तरह जंगलों से पूरी की जाती रही, तो भविष्य में वन्यजीव संरक्षण के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं। फिलहाल नर बाघ के गोरखपुर भेजे जाने को लेकर विभागीय हलकों में चुप्पी है, लेकिन यह मुद्दा अब सार्वजनिक बहस का रूप लेता जा रहा है। (संवाद)
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