बहराइच/कतर्नियाघाट। आओ तुम्हें जंगल की सैर कराऊं... शिकार करना सिखाऊं। देखो..यहां सिर्फ हमारा साम्राज्य है। तुम इस इलाके के राजा हो, इसलिए किसी से डरने की जरूरत नहीं...।
शायद ऐसा ही ये बाघिन अपने शावक से कह रही है, जो रात के अंधेरे में जंगल की आब-ओ-हवा से अपने शावक को रू-ब-रू कराने निकली। मोतीपुर रेंज की ये तस्वीर सोमवार रात जंगल में लगे कैमरे में कैद हुई है।
बाघिन कैमरे के सामने से कई बार गुजरी लेकिन उसके साथ सिर्फ एक शावक ही दिखा। हालांकि, वनाधिकारी दूसरे शावक के भी साथ होने का दावा कर रहे हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में बीते दो माह से बाघों का मूवमेंट बढ़ा है। कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा, ककरहा और सुजौली रेंज में बाघों की दहाड़ तो सुनाई पड़ती ही है लेकिन मोतीपुर रेंज में बाघों का मूवमेंट नहीं है।
आबादी से सटा होने के कारण यहां कभी-कभार सिर्फ तेंदुए ही आते हैं। लेकिन, पखवारे भर पहले एक बाघिन अपने दो शावकों के साथ मोतीपुर रेंज के बीट संख्या 26 के आसपास देखी गई थी।
ग्रामीणाें की सूचना पर वन विभाग ने छानबीन की तो बाघिन के आबादी से सटे जंगल में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों ने थर्मो सेंसर कैमरे लगाकर बाघ की निगरानी शुरू की।
सोमवार रात बाघिन अपने एक शावक के साथ कैमरे के सामने से दो बार गुजरी, जबकि तीन बार बाघिन का अकेले मूवमेंट कैमरे में कैद हुआ। मंगलवार सुबह कैमरा चेक किया गया तब इसकी पुष्टि हुई।
इसके बाद से वनाधिकारी काफी प्रसन्न हैं। प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी का कहना है कि मोतीपुर रेंज में शावकों के साथ बाघिन का इतने दिन तक टिके रहना काफी सुखद है। लग रहा है कि बाघों को जंगल का माहौल पूरी तरह रास आ रहा है।
टीमें निरंतर कर रही हैं गश्त
बाघिन और शावकों की सुरक्षा के लिए वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद आलम तथा डिप्टी रेंजर रामप्यारे और एसपी सिंह की अगुवाई में टीमें गठित हैं। यह टीमें निरंतर इलाके में गश्त कर बाघिन के मूवमेंट पर नजर रख रही हैं।
रास्ते पर आवागमन रोका
डीएफओ ने बताया कि बीट संख्या 26 में जहां पर बाघिन और शावकों का मूवमेंट है, वहां से कई रास्ते गुजरते हैं। गांव के लोग अक्सर लकड़ियां बीनने या अन्य कार्य से जंगल में दाखिल हो जाते हैं।
ऐसे में बाघिन उन पर हमलावर हो सकती है। एक डामरीकृत मार्ग भी है। सभी मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया है। बैरियर भी लगाया गया है।