बहराइच। रेहुआ मंसूर और बसौना माफी गांव के आसपास दिखाई दे रहे बाघ को दुधवा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने शनिवार शाम को ट्रैंकुलाइज कर काबू में कर लिया। बाघ को बेहोश किए जाने के बाद सुरक्षित पिंजरे में बंद कर जिला मुख्यालय स्थित रेंज कार्यालय लाया गया। महसी तहसील क्षेत्र में सप्ताह भर से बाघ दहशत का कारण बना हुआ था।
प्रभागीय वनाधिकारी सुंदरेशा ने बताया कि पकड़ा गया बाघ नर है और उसकी उम्र करीब पांच वर्ष आंकी गई है। वजन दो सौ किलो से अधिक है। बाघ को कतर्नियाघाट के वन्य चिकित्सक डॉ. दयाशंकर और डॉ. दीपक की टीम ने ट्रैंकुलाइज गन से बेहोश किया। उन्होंने बताया कि बाघ बसौना माफी गांव के निकट नाले के पार छिपा हुआ था, जहां उसकी सटीक लोकेशन मिलने के बाद सर्च ऑपरेशन को अंतिम रूप दिया गया।
शनिवार को दोपहर करीब 12 बजे रेस्क्यू अभियान के दूसरे दिन कतर्नियाघाट से लाई गई हथिनियों जयमाला और चंपाकली की मदद से व्यापक कॉम्बिंग शुरू की गई। इसी दौरान ड्रोन कैमरे से बाघ की लोकेशन बसौना माफी गांव के पास ट्रेस हुई। नाले के पार बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होते ही वन विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गया। संभावित रास्तों पर जाल लगाए गए। रेहुआ मंसूर गांव से अतिरिक्त कॉम्बिंग टीम को मौके पर बुलाया गया।
डीएफओ ने बताया कि बाघ लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था, इससे अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। हालांकि विशेषज्ञों की सतर्कता और रणनीति के चलते शाम के समय बाघ को सुरक्षित ढंग से ट्रैंकुलाइज कर लिया गया। बाघ के पकड़े जाने के बाद बसौना माफी, रेहुआ मंसूर सहित आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली।
बाघ को देर शाम जिला मुख्यालय स्थित रेंज कार्यालय लाया गया। डीएफओ सुंदरेशा ने बताया कि तीन वन्य चिकित्सकों का पैनल बाघ का स्वास्थ्य परीक्षण करेगा। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तय किया जाएगा कि बाघ को कहां और किस परिस्थिति में छोड़ा जाएगा।
ड्रोन से लोकेशन ट्रेस करने में मिली सफलता
रेस्क्यू अभियान में ड्रोन कैमरों की अहम भूमिका रही। ड्रोन से खेतों, झाड़ियों और नाले के आसपास लगातार निगरानी की गई, जिससे बाघ की सटीक लोकेशन ट्रेस हो सकी। जैसे ही बाघ के नाले के पार होने की पुष्टि हुई, टीम ने घेराबंदी कर ऑपरेशन को अंजाम दिया। बाघ के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।
वापस लौटेंगी हथिनियां
हथिनी जयमाला और चंपाकली की कॉम्बिंग बेहद सफल रही। रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद दोनों हथिनियां रात में रेहुआ मंसूर गांव में ही विश्राम करेंगी। रविवार सुबह उन्हें कतर्नियाघाट वापस भेज दिया जाएगा।
क्यों किया जाता है हाथियों का उपयोग
वन्यजीव रेस्क्यू अभियान में हाथियों का विशेष महत्व होता है। हाथी ऊंचाई से आसपास के क्षेत्र को बेहतर ढंग से देख सकते हैं, जिससे बाघ जैसी घात लगाकर हमला करने वाली प्रजाति पर नजर रखना आसान होता है। हाथी की पीठ पर सवार वन्य चिकित्सक और विशेषज्ञ सुरक्षित रहते हुए बाघ को ट्रैंकुलाइज गन से निशाना बना सकते हैं। इसके अलावा, हाथियों की मौजूदगी से बाघ अक्सर खुले में आने को मजबूर हो जाता है, जिससे उसे काबू में करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।