तराई में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच सेंक्चुरी क्षेत्र के वन्यजीवों की सक्रियता आबादी की ओर बढ़ रही है। जंगल से सटे रामपुर रेतिया गांव के निकट दो दिन से बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ रही है। इससे गांव के लोग दहशत में हैं। खेत-खलिहान जाने से भी लोगों को डर लग रहा है। मवेशियों को भी लोग अहाते से नहीं निकाल रहे।
सूचना रेंज कार्यालय को दी गई है, लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के सुजौली रेंज में रामपुर रेतिया गांव स्थित है। यह गांव जंगल से सटा हुआ है। बीते दो दिन से गांव के निकट जंगल से बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ रही है। इससे गांव के लोग काफी दहशत में हैं। लोग घरों से निकलने से डर रहे हैं।
गांव के राजितराम और सुंदरलाल का कहना है कि शाम के समय बाघ की दहाड़ अचानक बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते सप्ताह भर पूर्व एक बाघिन को जंगल के निकट देखा गया था। उसके बाद कोई वन्यजीव नहीं दिखा था तो इसे नियमित दिनचर्या मानकर सभी भूल गए थे। अब दो दिन से अचानक बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ रही है।
इससे घर से निकलने में भी डर लग रहा है। हालात यह है कि लोग खेत की ओर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। गौरतलब हो कि आए दिन गांव के आसपास कभी बाघ तो कभी तेंदुओं की आमद बनी रहती है। डेढ़ माह पूर्व तेंदुए ने हमला कर एक ग्रामीण को भी जख्मी भी किया था। वनकर्मी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे।
इससे लोगों को अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है। गांव के लोगों का कहना है कि साल भर पूर्व वन विभाग ने जंगल और गांव के निकट गहरी खाईं खोदने तथा कटीले तार लगवाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।