बहराइच के खेतों में बारिश के बाद भरा पानी।
बहराइच। बारिश और तेज हवा से खेतों में गन्ने की फसल गिर गई है। जलभराव से जड़ों को पर्याप्त हवा न मिलने के कारण लाल सड़न जैसी बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच प्रथम के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. आरसी वर्मा ने किसानों को फसल बचाने के उपाय बताए हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले खेत से पानी निकालें। इसके लिए खेत के निचले हिस्से या कोने में नाली बनाकर अतिरिक्त पानी बाहर निकालें। पानी निकलने के 24 से 48 घंटे के भीतर गिरे गन्ने को बिना झटका दिए सावधानी से सीधा करें। चार-पांच गन्नों को एक साथ कर सूखी पत्तियों या सुतली से बांधें।
अगोले से न बांधें, बीच से दें सहारा
गन्ने को गर्दन या अगोले वाले हिस्से से कसकर न बांधें। इससे बढ़वार प्रभावित हो सकती है। बीच वाले हिस्से से सहारा देकर बांधना बेहतर है। जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाकर अच्छी तरह दबाएं। जलभराव के बाद लाल सड़न का खतरा होने पर कार्बेंडाजिम या थायोफिनेट मिथाइल दो ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। फसल की बढ़वार के लिए एनपीके 19:19:19 पांच किलो प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। फसल पीली पड़ने पर पानी निकलने के बाद यूरिया का हल्का छिड़काव किया जा सकता है।
फसल बचाने के लिए चार जरूरी कदम
-खेत में जमा अतिरिक्त पानी तत्काल निकालें।
-24 से 48 घंटे के भीतर गिरे गन्ने को सावधानी से सीधा कर बांधें।
-गन्ने को अगोले से कसकर न बांधें, बीच के हिस्से से सहारा दें।
-जड़ों पर मिट्टी चढ़ाने के बाद जरूरत के अनुसार दवा और पोषक तत्वों का छिड़काव करें।