तराई में पड़ रही कड़ाके की ठंड के चलते शीत जनित निमोनिया और कोल्ड डायरिया का कहर बढ़ गया है। जिला अस्पताल में भर्ती कोल्ड डायरिया पीड़ित एक मासूम की मौत हो गई। दो अन्य पीड़ित बच्चों ने निजी चिकित्सकों के यहां दम तोड़ दिया। निमोनिया और कोल्ड डायरिया से पीड़ित और 22 लोग भर्ती कराए गए हैं। उनमें चार की हालत नाजुक बताई जा रही है।
तराई में कड़ाके की ठंड बच्चों पर भारी पड़ने लगी है। अभिभावकों की लापरवाही के चलते बच्चे कराह रहे हैं। शुक्रवार को विशेश्वरगंज निवासी शिफा (3) पुत्री मोहम्मद शफी को कोल्ड डायरिया से पीड़ित हालत में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान शनिवार सुबह उसकी तबियत और बिगड़ गई। चिल्ड्रेन आईसीयू में दोपहर को शिफा ने दम तोड़ दिया।
उसे उल्टी-दस्त के साथ तेज बुखार भी था। उधर कैसरगंज में बंधा निवासी बबलू (3) पुत्र दयाराम को सुबह पेट दर्द की शिकायत हुई। इसके बाद मिचली और उल्टी दस्त शुरू हो गया। परिवार के लोगों ने घरेलू इलाज किया लेकिन लाभ नहीं होने पर उसे निजी चिकित्सक के यहां ले गए। ड्रिप चढ़ाते समय हालत बिगड़ गई।
इस पर निजी डॉक्टर ने जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिवारीजन जब तक अस्पताल ले जाते तब तक बच्चे ने दम तोड़ दिया। उधर नेपाल के बर्दिया जिला में आंबा गांव निवासी पप्पू के डेढ़ वर्षीय पुत्र संगम को उल्टी-दस्त की शिकायत पर बिछिया बाजार में निजी चिकित्सक के यहां ले जाया गया।
प्राथमिक उपचार के दौरान हालत गंभीर होने पर उसे सीएचसी मोतीपुर रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचते ही बच्चे की मौत हो गई। परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर लौट गए हैं।
गौरतलब हो कि तराई में मौसम परिवर्तन के चलते निमोनिया और कोल्ड डायरिया का कहर बढ़ा है।
जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा का कहना है कि मौसम परिवर्तित हो रहा है। ऐसे में रात में सोते समय बच्चों का विशेष ध्यान रखें। उन्हें कंबल या रजाई अवश्य ओढ़ाएं। ठंड लगने का एहसास होने पर झोलाछाप से इलाज कराने से बचें।