होली नजदीक आने के साथ ही लोगों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। एक दूसरे को रंग से सराबोर करने के लिए लोगों ने रंग व पिचकारियों की खरीददारी शुरू कर दी है। इस बार मोदी के नाम की पिचकारी लोगों की पसंद बनी हुई है। चायनीज पिचकारियों की मांग ज्यादा है। इनमें अलग-अलग डिजायन वाली पिचकारी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहीं हैं।
होली में सिर्फ तीन दिन बचे हैं। होली पर बच्चे खास तौर पर पिचकारियों पर मोहित रहते हैं। इस साल भी बच्चों के लिए विभिन्न आकार में पिचकारी बाजार में उपलब्ध हैं। मोदी के नाम की पिचकारी की डिमांड अधिक है। चाइनीज पिचकारियों से बाजार पटा पड़ा है। फल, सब्जी, बंदूक, पिस्टल व अन्य तरह की पिचकारियों को लेने के लिए बच्चे उत्सुक हैं।
बड़ों के लिए भी कई तरह पिचकारियां बाजार में हैं। देशी पिचकारियों का बाजार भी चमक रहा है। पिचकारी व्यवसायी विवेक कुमार ने बताया कि इस वर्ष मंगाई जरूर बढ़ी है फिर भी पिचकारियों की डिमांड में कोई कमी नहीं आई है। बच्चों के लिए अधिकतर लोग पिचकारियां ले जा रहे हैं।
पिचकारियों की कीमत
मोदी के नाम की प्रेशर पिचकारी - 150 रुपये
बैगन, कद्दू, टमाटर, करेला के आकार की पिचकारी- 15 से 55 रुपये में
सेब, संतरा, केला, अनन्नास, खरबूजा, अनार आकार की पिचकारी- 10 से 90 रुपये
एके 47, दो नाली बंदूक, पिस्टल की पिचकारी - 30 से 170 रुपये
भगवान के विभिन्न रूपों की पिचकारी- 25 से 150 रुपये
पंप पिचकारी- 10 से 950 रुपये तक (स्टील पीतल, लोहे व प्लास्टिक में उपलब्ध)
स्टोव पिचकारी- 300 से 3000 रुपये तक (स्टील, पीतल और लोहे में उपलब्ध)
रंगों के रसायन कर सकते परेशान : केडीसी में रसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. विवेक दीक्षित ने बताया कि रेड, सिल्वर, ब्लैक व ग्रीन कलर में लेड आक्साइड, क्रोमियम ब्रोमाइड, कॉपर सल्फेट आदि तमाम तरह के रसायनिक पदार्थ मिले होते हैं। इन रंगों के चलते शरीर पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं। इस कारण त्वचा में कैंसर, मीना माता, पैरालिसिस और आंखों में झिलमिलाहट के रोग हो सकते हैं।
किस रंग को कैसे बनाया जाता : सिल्वर कलर- यह एल्यूमीनियम ब्रोमाइड से बनता है। इसके प्रयोग से कैसर होने का खतरा अधिक रहता है। ब्लैक कलर- यह लेड आक्साइड से तैयार होता है। इसके प्रयोग से किडनी फेल होने का खतरा बनता है। श्रवण शक्ति का हृास होता है।
ऐसे करें बचाव : जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरबी सिंह का कहना है कि रासायनिक रंगों का प्रयोग अगर होता भी है तो उससे बचने के लिए पहले से तैयारियां कर लें। होली का हुड़दंग करने के लिए शरीर पर कड़वा तेल या कोकोनट आयल का लेप लगाकर ही घर से निकलें। चश्मा जरूर लगाएं। सिर पर टोपी का इस्तेमाल करें।
साढ़े छह रुपये किलो बिक रही लकड़ी
होलिकादहन के लिए लकड़ी की खरीददारी भी तेज हुई है। लकड़ी कारोबारी विपिन ने बताया कि आम की लकड़ी साढ़े छह रुपये किलो बिक रही है। अब तक 22 क्विंटल लकड़ी बिकी है। दो दिनों में बिक्री दो गुना होने की संभावना है।
180 से 200 रुपये किलो बि रहा खोया : होली के मद्देनजर रविवार को चौक बाजार में स्थित खेया मंडी में खेया की जमकर बिक्री हुई। सुबह से ही खरीददारों की भीड़ उमड़ती रही। डिमांड अधिक होने के चलते खोया 180-200 रुपये प्रतिकिलो बिका।