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Bahraich News: महसी की डेढ़ लाख की आबादी पर बाढ़ का साया

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सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद शुरू हुई कटान।
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महसी। मानसून की आहट के साथ ही सरयू नदी के किनारे बसी महसी तहसील के बाढ़ प्रभावित गांवों में चिंता बढ़ने लगी है। हर वर्ष बाढ़ और कटान की मार झेलने वाली 65 ग्राम पंचायतों की करीब डेढ़ लाख की आबादी एक बार फिर संभावित बाढ़ की आशंका से सहमा हुई है। पिछले वर्षों की तबाही और विस्थापन के कटु अनुभवों को देखते हुए सभी ने बचाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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महसी के मांझा दरिया बुर्द, जानकीनगर, कायमपुर, टिकुरी, कोढ़वा, पिपरा, पिपरी, गोलागंज, जोगापुरवा, छत्तरपुरवा, सिलौटा, कुट्टी बाग, प्रहलाद पुरवा और रानी बाग समेत 24 से अधिक गांव हाई रिस्क श्रेणी में हैं। नदी का जलस्तर बढ़ते ही सबसे पहले इन गांवों में पानी आबादी तक पहुंचता है और 15 से 45 दिनों तक जलभराव बना रहता है।

जानकीनगर गलकारा निवासी रामलाल बताते हैं कि पिछली बाढ़ में उनकी धान और गन्ने की फसल नष्ट हो गई थी। वहीं मांझा दरिया बुर्द की सरोज देवी कहती हैं कि घर में पानी भर जाने के बाद परिवार को कई दिनों तक तटबंध पर शरण लेनी पड़ी थी। ऐसे में इस बार पहले से ही जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने और संभावित विस्थापन की तैयारी की जा रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन हर वर्ष तैयारियों के दावे करता है, लेकिन मौके पर जिंदगी बचाने के लिए खुद ही संघर्ष करना पड़ता है। हालांकि उपजिलाधिकारी प्रकाश सिंह का कहना है कि बाढ़ से बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संवेदनशील गांवों की निगरानी के लिए लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है।

तीन बार नदी में समा चुका है मकान
टिकुरी के ग्राम प्रधान संजय त्रिवेदी ने बताया कि पूरी ग्राम पंचायत बाढ़ और कटान से प्रभावित है तथा हर वर्ष सैकड़ों बीघा जमीन सरयू नदी में समा जाती है। उन्होंने कहा कि इस बार बन रहे स्टड और स्पर से काफी उम्मीदें हैं। टिकुरी निवासी सोनेलाल का घर पिछले वर्ष कटान में बह गया था। वहीं कोढ़वा निवासी धर्मेंद्र शुक्ला बताते हैं कि उनका मकान तीन बार नदी में समा चुका है और चौथी बार फिर खतरे में है। वर्तमान में नदी उनके घर से मात्र 200 मीटर दूरी पर बह रही है।
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फैक्ट फाइल
65 ग्राम पंचायतें बाढ़ से होती हैं प्रभावित
करीब 1.50 लाख की आबादी खतरे के दायरे में
1836.712 हेक्टेयर क्षेत्र हर वर्ष जलप्लावित
कई गांवों में 15 से 45 दिन तक रहता है जलभराव
फसल, सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाएं होती हैं प्रभावित
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