बहराइच। सरयू नदी का जलस्तर भले ही धीरे-धीरे घट रहा हो, लेकिन नदी की लहरों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। पानी पीछे हट रहा है और नदी किनारे बसे गांव के घरों को अपने साथ बहाकर ले जा रही है। महसी और नानपारा तहसील के छह गांव इस वक्त तेज कटान के जद में हैं।
बीते 24 घंटे में चार मकान नदी में समा गए, जबकि नारायण कला गांव का शिव मंदिर अब नदी की लहरों के सीधे निशाने पर है, मंदिर के पास तेज कटान हो रहा है। दोनों तहसीलों के 70 से ज्यादा मकान सरयू की धारा में अब तक विलीन हो चुके हैं।
महसी के जानकीनगर गांव में सरयू के कटान ने रातोंरात तीन परिवारों को बेघर कर दिया। शिवपुरी के परागी बेली में जुग्गीलाल अवस्थी का घर नदी की लहरों में रविवार की रात समा गया। झुंडी, बेला मकन, पसियन पुरवा और पारगी बेली में हालात इतने खराब हैं कि लोग खुद अपने घर तोड़कर सुरक्षित जगह पलायन करने को मजबूर हैं।
गृहस्थी का सामान सिर पर लादे, नम आंखों के साथ लोग अपने पुराने आशियाने को पीछे छोड़ रहे हैं। हालांकि जलस्तर में कमी आई है, लेकिन गिरिजापुरी बैराज, शारदा और गोपिया बैराज से सोमवार को भी 2,81,666 क्यूसेक पानी सरयू में छोड़ा गया, जिससे नदी का उफान पूरी तरह थमने के आसार नहीं हैं।
प्रशासन नदारद, लोग बेबस
जलस्तर में गिरावट देखते ही प्रशासनिक अमला और राहत टीम के अधिकारी-कर्मचारी गांवों से खिसक गए हैं। शिवपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोग छत और सुरक्षित ठिकाने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन मौके पर न तो कोई राजस्व कर्मी है, न ही राहत पहुंचाने की कोई सक्रिय व्यवस्था। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की तरफ से मदद के वादे तो बहुत हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वे अब भी खुले आसमान तले अपने बच्चों और बूढ़ों के साथ रहने को मजबूर हैं।
राजस्व टीम मौके पर : एसडीएम
महसी। सरयू नदी महसी की जानकीनगर में कटान कर रही हैं। रविवार रात रामरानी, गोकर्ण, जीवन, पुत्ती लाला, रमेश, राम जीवन के मकान नदी में समाहित हो गए है। इसी के साथ ही किसानों की 10 एकड़ भूमि कट गई। गांव के मुनाउ व त्रिभुवन ने बताया कि गांव के पास में कटान तेजी से हो रही है। एसडीएम राम दयाल ने बताया कि राजस्व टीम मौके पर है।